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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

Dharavahik Upanyas ---Anhoni ---{84}

वहां से निकलकर दोनों जीप दुर्घटना स्थल पर जा पहुंचे। उस समय तक दिवाकर वशिष्ठ ने एक स्थानीय निवासी किशन सिंह को भेज कर पुलिस फोटोग्राफर अखिलेश राणावत को बुला लिया था। उसने सभी एंगल्स से फोटोग्राफ्स लिए,अनिरुद्ध चौधरी ने उसे एक घंटे में फिल्म डेवेलोप करवा कर देने को कहा,वह तुरंत ही सोनू स्टूडियो की ओर चला गया ,और तब अंजुरी की मृत देह को अस्पताल की ओर ले जाने के लिए पुलिस जीप में रखवाया गया। तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी उसी जीप में सवार हो गए ,उनकी जीप इस समय उनका ड्राइवर रघुनाथ चला रहा था जो यह समाचार सुन कर वहां आ गया था। स्थानीय सरकारी अस्पताल बाजार में प्रवेश से पहले ही था ,और वहां भी हाल ही में बड़े डॉक्टर चेतन रेड्डी आये थे। वे अपने व्यवसाय में निष्णात एक वयस्क डॉक्टर थे। अविवाहित थे और अपने कार्य के प्रति पूर्णतः निष्ठ थे। उन्हें भी यह समाचार मिल चुका था। जब अंजुरी की मृत देह को पोस्ट मार्टम हेतु टेबल पर रखा और उसके मुख से उसीका वह दुपट्टा उन्होंने हटाया तो वे आश्चर्य चकित रह गए। परसों शाम ही तो उन्होंने मुख्य अतिथि बन कर महाविद्यालय में उसका नृत्य देखा था। वे सर्वाधिक उसीके नृत्य से प्रभावित हुए थे और उन्होंने पुरस्कार की घोषणा भी करवाई थी। किन्तु निर्जीव देह की दशा बता रही थी कि वह उससे भी पहले मृत्यु को प्राप्त हुई थी। 
उन्होंने बाहर आकर यह बात इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी और तहसीलदार अनमोल ठाकुर और उनकी पत्नी अंजना ठाकुर को कही। उन्होंने सुझाव दिया कि क्यों नहीं यह पोस्टमार्टम शहर में विशेषज्ञ से करवाया जाय ,क्यूंकि मृत्यु का सही समय जानना अत्यंत आवश्यक है और यही आगे के अन्वेषण की दिशा भी दर्शाएगा। अनिरुद्ध चौधरी सहमत हो गए। तभी अखिलेश राणावत भी फोटो लेकर आ पहुंचा था। तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी भी साथ जाने को तत्पर थे। उन्होंने अनिरुद्ध चौधरी से कहा कि वे तहसील के बाहर उनकी प्रतीक्षा करेंगे। अनिरुद्ध चौधरी ने कहा वे अंजुरी के कमरे को ना छुएं उन्हें छानबीन करनी होगी।  ---क्रमशः ---

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