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शनिवार, 21 सितंबर 2024

Dharm & Darshan ! An Amazing Machine !

    *!! हे परमेश्वर !!*


कोई भी आवेदन नहीं किया था, 

किसी की भी सिफारिश नहीं थी,

फिर भी सिर के *बालों से* लेकर पैर के *अंगूठे तक* 24 घंटे भगवान, 

आप *रक्त* प्रवाहित करते है...

*जीभ पर* नियमित अभिषेक हो रहा है...

निरंतर आप मेरा ये 

*हृदय* चला रहे है...


चलने वाला ये कौन सा *यंत्र* आपने फिट कर दिया है *हे भगवान...*

*पैर के नाखून से लेकर सिर के बालों तक बिना रुकावट संदेशवाहन करने वाली प्रणाली...*

किस *अदृश्य शक्ति* से चल रही है

कुछ समझ नहीं आता।


*हड्डियों और मांस में* बनने वाला *रक्त* कौन सा अद्वितीय *आर्किटेक्चर* है...

इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं है।

 *हजारों प्रकार की गंध* की सटीक पहचान करने वाली अनोखी *नासिका।* 

*हजार-हजार मेगापिक्सल वाले दो-दो कैमरे* दिन-रात सारी दृश्यें कैद कर रहे हैं।


*दस-दस हजार* टेस्ट करने वाली *जीभ* नाम की टेस्टर,


अनगिनत *संवेदनाओं* का अनुभव कराने वाली *त्वचा* नाम की *सेंसर प्रणाली*...

और...

अलग-अलग *फ्रीक्वेंसी की* आवाज पैदा करने वाली *स्वर प्रणाली*

और

उन फ्रीक्वेंसी का *कोडिंग-डीकोडिंग* करने वाले *कान* नाम का यंत्र...


*पचहत्तर प्रतिशत पानी से भरा शरीर रूपी टैंकर हजारों छेद होने के बावजूद कहीं भी लीक नहीं होता...*


*स्टैंड के बिना* मैं खड़ा रह सकता हूँ...

गाड़ी के *टायर* घिसते हैं, परंतु पैर के *तलवे* कभी नहीं घिसते।

*अद्भुत* ऐसी रचना है ,भगवान आपकी।


देखभाल, स्मृति, शक्ति, शांति ये सब भगवान आप

ही देते है।

आप ही अंदर बैठ कर यह *शरीर* चला रहे है।

*अद्भुत* है यह सब, *अविश्वसनीय,*

*अबूझ , अतुलनीय।*


ऐसे *शरीर रूपी* मशीन में हमेशा भगवान आप  ही हो ,

इसका अनुभव कराने वाली *आत्मा* भगवान आपने ऐसा कुछ *फिट* कर दिया है कि और क्या आपसे मांगू ...


आपके इस *जीवाशिवा* के खेल का निश्छल, 

*निस्वार्थ आनंद* का हिस्सा रहूँ!...

ऐसी *सद्बुद्धि* मुझे दे!!


आप ही यह सब संभालते है इसका *अनुभव* मुझे हमेशा रहे!!!

*रोज पल-पल कृतज्ञता से आपका ऋणी होने का स्मरण, चिंतन हो,*

*यही परमेश्वर के चरणों में प्रार्थना है!*.


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