चार वेद षट शास्त्र में बात मिली है दोय ,
दुःख दीन्हे दुःख होत है ,सुख कीन्हे सुख होय !
ग्रन्थ पंथ सब जगत के बात बतावत तीन
राम हृदय ,मन में दया ,तन सेवा में लीन !
जिसकी जैसी भावना सो तैसा गुण लीन
कदली सीप भुजंग मुख ,एक बूँद गुण तीन !
अर्थात : स्वाति नक्षत्र में जल बिंदु एक ही है ,किन्तु केले में कपूर बनता है सीप में मोती बनता है सांप के मुख वह बूँद विष ही बनता है !
विद्या वित्त सुरूप गुण सुत दारा सुख भोग
नारायण बिन भक्ति बिन ,यह सब ही है रोग !
Laugh when you meet misfortune,There is nothing like this to overcome it and pass on victory !—-Tiruvalluvar
प्रेम का समाधान देने में है ,अहंकार का समेटने में
तुलसी चित चिंता न मिटे ,बिनु चिंतामणि पहचाने
अपने को भूलोगे ,तभी अपने को नापोगे ,
खुद को पाओगे तो बेखुदी में ही पाओगे !
रूप यौवन सम्पन्ना ,विशाल कुलसम्भवाः
विद्या हीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुका { पलाश का फूल }
असम्भवम् हेम मृगस्य जन्म
तथापि रामं लुलुभे मृगाय
प्रायः समापन्न विपत्तिकाले
धियो हि पूसाम मलिन भवन्ति !
जिसको पराजय का डर है ,उसकी हार निश्चित है —नेपोलियन
भाग्य पर नहीं चरित्र पर निर्भर रहिये
कोई भी किसी के बारे में निर्णय देने का अधिकारी नहीं ,दंड देना ईश्वर के हाथ की बात है ,मनुष्य के हाथ की नहीं ——स्टीफेन ज्विग
जब धीरे धीरे सब लौकिक सहारे टूट जाते हैं तब वह अपना करिश्मा दिखलाता है
ईश्वर दर्शन के लिए भटकना कहाँ है ? हमको वह दीदा पैदा करना है जिसमे नर रूप में नारायण के दर्शन हों
थक जाने पर मृत्यु है मनुज हेतु विश्राम
चलता आगे पुनः करके कुछ आराम !
सारा संसार ज्ञान की एक पुस्तक है जिसमे वे लोग जो घर से बाहर नहीं जाते केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं —-संत अगस्टाइन
ज्ञान धन से बड़ा है ,धन हम रखते हैं पर ज्ञान हमारी रखवाली करता है –याग्यवल्क
ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्द्येश्य शुभ ना हो —-प्लेटो
जितना ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं ,उतना ही हमको ज्ञान का आभास होता है —शैली
जीवन में कभी ऐसे प्रसंग आते हैं जब सामान्य से अधिक बुद्धिमत्ता खतरनाक साबित होती है —शीलर
It is much easier tu be critical than to be correct —Benjamin Disraeli
The acts of today may become the precedeuls of tomorrow—-Farrer Herschell
Distrust that man who tells you to distrust —Wilcox
वो पुष्प का हार क्या बनेगा ,जिसने ना सीखा हृदय बिंधवाना —जयशंकर प्रसाद
चार वेद षट शास्त्र में बात मिली है दोय ,
दुःख दीन्हे दुःख होत है ,सुख कीन्हे सुख होय !
ग्रन्थ पंथ सब जगत के बात बतावत तीन
राम हृदय ,मन में दया ,तन सेवा में लीन !
जिसकी जैसी भावना सो तैसा गुण लीन
कदली सीप भुजंग मुख ,एक बूँद गुण तीन !
अर्थात : स्वाति नक्षत्र में जल बिंदु एक ही है ,किन्तु केले में कपूर बनता है सीप में मोती बनता है सांप के मुख वह बूँद विष ही बनता है !
विद्या वित्त सुरूप गुण सुत दारा सुख भोग
नारायण बिन भक्ति बिन ,यह सब ही है रोग !
Laugh when you meet misfortune,There is nothing like this to overcome it and pass on victory !—-Tiruvalluvar
प्रेम का समाधान देने में है ,अहंकार का समेटने में
तुलसी चित चिंता न मिटे ,बिनु चिंतामणि पहचाने
अपने को भूलोगे ,तभी अपने को नापोगे ,
खुद को पाओगे तो बेखुदी में ही पाओगे !
रूप यौवन सम्पन्ना ,विशाल कुलसम्भवाः
विद्या हीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुका { पलाश का फूल }
असम्भवम् हेम मृगस्य जन्म
तथापि रामं लुलुभे मृगाय
प्रायः समापन्न विपत्तिकाले
धियो हि पूसाम मलिन भवन्ति !
जिसको पराजय का डर है ,उसकी हार निश्चित है —नेपोलियन
भाग्य पर नहीं चरित्र पर निर्भर रहिये
कोई भी किसी के बारे में निर्णय देने का अधिकारी नहीं ,दंड देना ईश्वर के हाथ की बात है ,मनुष्य के हाथ की नहीं ——स्टीफेन ज्विग
जब धीरे धीरे सब लौकिक सहारे टूट जाते हैं तब वह अपना करिश्मा दिखलाता है
ईश्वर दर्शन के लिए भटकना कहाँ है ? हमको वह दीदा पैदा करना है जिसमे नर रूप में नारायण के दर्शन हों
थक जाने पर मृत्यु है मनुज हेतु विश्राम
चलता आगे पुनः करके कुछ आराम !
सारा संसार ज्ञान की एक पुस्तक है जिसमे वे लोग जो घर से बाहर नहीं जाते केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं —-संत अगस्टाइन
ज्ञान धन से बड़ा है ,धन हम रखते हैं पर ज्ञान हमारी रखवाली करता है –याग्यवल्क
ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्द्येश्य शुभ ना हो —-प्लेटो
जितना ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं ,उतना ही हमको ज्ञान का आभास होता है —शैली
जीवन में कभी ऐसे प्रसंग आते हैं जब सामान्य से अधिक बुद्धिमत्ता खतरनाक साबित होती है —शीलर
It is much easier tu be critical than to be correct —Benjamin Disraeli
The acts of today may become the precedeuls of tomorrow—-Farrer Herschell
Distrust that man who tells you to distrust —Wilcox
वो पुष्प का हार क्या बनेगा ,जिसने ना सीखा हृदय बिंधवाना —जयशंकर प्रसाद
चार वेद षट शास्त्र में बात मिली है दोय ,
दुःख दीन्हे दुःख होत है ,सुख कीन्हे सुख होय !
ग्रन्थ पंथ सब जगत के बात बतावत तीन
राम हृदय ,मन में दया ,तन सेवा में लीन !
जिसकी जैसी भावना सो तैसा गुण लीन
कदली सीप भुजंग मुख ,एक बूँद गुण तीन !
अर्थात : स्वाति नक्षत्र में जल बिंदु एक ही है ,किन्तु केले में कपूर बनता है सीप में मोती बनता है सांप के मुख वह बूँद विष ही बनता है !
विद्या वित्त सुरूप गुण सुत दारा सुख भोग
नारायण बिन भक्ति बिन ,यह सब ही है रोग !
Laugh when you meet misfortune,There is nothing like this to overcome it and pass on victory !—-Tiruvalluvar
प्रेम का समाधान देने में है ,अहंकार का समेटने में
तुलसी चित चिंता न मिटे ,बिनु चिंतामणि पहचाने
अपने को भूलोगे ,तभी अपने को नापोगे ,
खुद को पाओगे तो बेखुदी में ही पाओगे !
रूप यौवन सम्पन्ना ,विशाल कुलसम्भवाः
विद्या हीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुका { पलाश का फूल }
असम्भवम् हेम मृगस्य जन्म
तथापि रामं लुलुभे मृगाय
प्रायः समापन्न विपत्तिकाले
धियो हि पूसाम मलिन भवन्ति !
जिसको पराजय का डर है ,उसकी हार निश्चित है —नेपोलियन
भाग्य पर नहीं चरित्र पर निर्भर रहिये
कोई भी किसी के बारे में निर्णय देने का अधिकारी नहीं ,दंड देना ईश्वर के हाथ की बात है ,मनुष्य के हाथ की नहीं ——स्टीफेन ज्विग
जब धीरे धीरे सब लौकिक सहारे टूट जाते हैं तब वह अपना करिश्मा दिखलाता है
ईश्वर दर्शन के लिए भटकना कहाँ है ? हमको वह दीदा पैदा करना है जिसमे नर रूप में नारायण के दर्शन हों
थक जाने पर मृत्यु है मनुज हेतु विश्राम
चलता आगे पुनः करके कुछ आराम !
सारा संसार ज्ञान की एक पुस्तक है जिसमे वे लोग जो घर से बाहर नहीं जाते केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं —-संत अगस्टाइन
ज्ञान धन से बड़ा है ,धन हम रखते हैं पर ज्ञान हमारी रखवाली करता है –याग्यवल्क
ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्द्येश्य शुभ ना हो —-प्लेटो
जितना ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं ,उतना ही हमको ज्ञान का आभास होता है —शैली
जीवन में कभी ऐसे प्रसंग आते हैं जब सामान्य से अधिक बुद्धिमत्ता खतरनाक साबित होती है —शीलर
It is much easier tu be critical than to be correct —Benjamin Disraeli
The acts of today may become the precedeuls of tomorrow—-Farrer Herschell
Distrust that man who tells you to distrust —Wilcox
वो पुष्प का हार क्या बनेगा ,जिसने ना सीखा हृदय बिंधवाना —जयशंकर प्रसाद
चार वेद षट शास्त्र में बात मिली है दोय ,
दुःख दीन्हे दुःख होत है ,सुख कीन्हे सुख होय !
ग्रन्थ पंथ सब जगत के बात बतावत तीन
राम हृदय ,मन में दया ,तन सेवा में लीन !
जिसकी जैसी भावना सो तैसा गुण लीन
कदली सीप भुजंग मुख ,एक बूँद गुण तीन !
अर्थात : स्वाति नक्षत्र में जल बिंदु एक ही है ,किन्तु केले में कपूर बनता है सीप में मोती बनता है सांप के मुख वह बूँद विष ही बनता है !
विद्या वित्त सुरूप गुण सुत दारा सुख भोग
नारायण बिन भक्ति बिन ,यह सब ही है रोग !
Laugh when you meet misfortune,There is nothing like this to overcome it and pass on victory !—-Tiruvalluvar
प्रेम का समाधान देने में है ,अहंकार का समेटने में
तुलसी चित चिंता न मिटे ,बिनु चिंतामणि पहचाने
अपने को भूलोगे ,तभी अपने को नापोगे ,
खुद को पाओगे तो बेखुदी में ही पाओगे !
रूप यौवन सम्पन्ना ,विशाल कुलसम्भवाः
विद्या हीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुका { पलाश का फूल }
असम्भवम् हेम मृगस्य जन्म
तथापि रामं लुलुभे मृगाय
प्रायः समापन्न विपत्तिकाले
धियो हि पूसाम मलिन भवन्ति !
जिसको पराजय का डर है ,उसकी हार निश्चित है —नेपोलियन
भाग्य पर नहीं चरित्र पर निर्भर रहिये
कोई भी किसी के बारे में निर्णय देने का अधिकारी नहीं ,दंड देना ईश्वर के हाथ की बात है ,मनुष्य के हाथ की नहीं ——स्टीफेन ज्विग
जब धीरे धीरे सब लौकिक सहारे टूट जाते हैं तब वह अपना करिश्मा दिखलाता है
ईश्वर दर्शन के लिए भटकना कहाँ है ? हमको वह दीदा पैदा करना है जिसमे नर रूप में नारायण के दर्शन हों
थक जाने पर मृत्यु है मनुज हेतु विश्राम
चलता आगे पुनः करके कुछ आराम !
सारा संसार ज्ञान की एक पुस्तक है जिसमे वे लोग जो घर से बाहर नहीं जाते केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं —-संत अगस्टाइन
ज्ञान धन से बड़ा है ,धन हम रखते हैं पर ज्ञान हमारी रखवाली करता है –याग्यवल्क
ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्द्येश्य शुभ ना हो —-प्लेटो
जितना ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं ,उतना ही हमको ज्ञान का आभास होता है —शैली
जीवन में कभी ऐसे प्रसंग आते हैं जब सामान्य से अधिक बुद्धिमत्ता खतरनाक साबित होती है —शीलर
It is much easier tu be critical than to be correct —Benjamin Disraeli
The acts of today may become the precedeuls of tomorrow—-Farrer Herschell
Distrust that man who tells you to distrust —Wilcox
वो पुष्प का हार क्या बनेगा ,जिसने ना सीखा हृदय बिंधवाना —जयशंकर प्रसाद
चार वेद षट शास्त्र में बात मिली है दोय ,
दुःख दीन्हे दुःख होत है ,सुख कीन्हे सुख होय !
ग्रन्थ पंथ सब जगत के बात बतावत तीन
राम हृदय ,मन में दया ,तन सेवा में लीन !
जिसकी जैसी भावना सो तैसा गुण लीन
कदली सीप भुजंग मुख ,एक बूँद गुण तीन !
अर्थात : स्वाति नक्षत्र में जल बिंदु एक ही है ,किन्तु केले में कपूर बनता है सीप में मोती बनता है सांप के मुख वह बूँद विष ही बनता है !
विद्या वित्त सुरूप गुण सुत दारा सुख भोग
नारायण बिन भक्ति बिन ,यह सब ही है रोग !
Laugh when you meet misfortune,There is nothing like this to overcome it and pass on victory !—-Tiruvalluvar
प्रेम का समाधान देने में है ,अहंकार का समेटने में
तुलसी चित चिंता न मिटे ,बिनु चिंतामणि पहचाने
अपने को भूलोगे ,तभी अपने को नापोगे ,
खुद को पाओगे तो बेखुदी में ही पाओगे !
रूप यौवन सम्पन्ना ,विशाल कुलसम्भवाः
विद्या हीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुका { पलाश का फूल }
असम्भवम् हेम मृगस्य जन्म
तथापि रामं लुलुभे मृगाय
प्रायः समापन्न विपत्तिकाले
धियो हि पूसाम मलिन भवन्ति !
जिसको पराजय का डर है ,उसकी हार निश्चित है —नेपोलियन
भाग्य पर नहीं चरित्र पर निर्भर रहिये
कोई भी किसी के बारे में निर्णय देने का अधिकारी नहीं ,दंड देना ईश्वर के हाथ की बात है ,मनुष्य के हाथ की नहीं ——स्टीफेन ज्विग
जब धीरे धीरे सब लौकिक सहारे टूट जाते हैं तब वह अपना करिश्मा दिखलाता है
ईश्वर दर्शन के लिए भटकना कहाँ है ? हमको वह दीदा पैदा करना है जिसमे नर रूप में नारायण के दर्शन हों
थक जाने पर मृत्यु है मनुज हेतु विश्राम
चलता आगे पुनः करके कुछ आराम !
सारा संसार ज्ञान की एक पुस्तक है जिसमे वे लोग जो घर से बाहर नहीं जाते केवल एक ही पृष्ठ पढ़ पाते हैं —-संत अगस्टाइन
ज्ञान धन से बड़ा है ,धन हम रखते हैं पर ज्ञान हमारी रखवाली करता है –याग्यवल्क
ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्द्येश्य शुभ ना हो —-प्लेटो
जितना ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं ,उतना ही हमको ज्ञान का आभास होता है —शैली
जीवन में कभी ऐसे प्रसंग आते हैं जब सामान्य से अधिक बुद्धिमत्ता खतरनाक साबित होती है —शीलर
It is much easier tu be critical than to be correct —Benjamin Disraeli
The acts of today may become the precedeuls of tomorrow—-Farrer Herschell
Distrust that man who tells you to distrust —Wilcox
वो पुष्प का हार क्या बनेगा ,जिसने ना सीखा हृदय बिंधवाना —जयशंकर प्रसाद
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें