Tuesday, November 21, 2017

Grandma's Stories---1076---Detective Dora !! { 93 }

Nitin and Kalpesh came to the town for their bread and butter.Their Uncle  Virjee Bhai  { Mom's Elder Brother} invested some money and started a hardware shop for them.Both of them were hard working and gradually increased their business.Uncle took some money from them as interest but then he stopped thinking that they are his sisters sons.Later o both of them married to two sisters Jigna and Ramila.
The life was going on smoothly while suddenly one day Kalpesh vanished.Kalpesh was elder brother, closing the shutters and locking the shop was every day done by him,but that night he never reached back home.
FIR of missing complaint was lodged by Nitin.Dora and Rohan went to their house.They inquired first from their uncle Virjee Bhai,but came to know that both the brothers are very simple and were doing fair business.There was no dispute between both the brothers. Police informer Pintu was asked to inquire and search some clue.
Dora came to know that There became a fight between Kalpesh and Ajit Desai a cloth merchant.Dora went to his shop and asked how they knew each other and what was the reason of their fight.He said ," He had started that shop recently and he bought the required hardware from Kalpesh's shop,and they became friends.He didn't tell any thing more.
Dora asked Nitin about the fight.
He said," Kalpesh and Ajit Desai became friends and they decided to buy a car in partnership for personal use.The car was kept in Kalpesh's garage .For one year everything was smooth but then Ajit came to know that Kalpesh had started renting the car as taxi.So he came and started abusing Kalpesh.Kalpesh called him after two days and when Ajit came after two days Kalpesh paid 50 % of Car's price and asked him not to show his face again."
This was the basic line Dora decided to work on.She asked other shopkeepers and came to know that two rowdy type were persons seen with Ajit Desai yesterday.
Police arrested Ajit,he was interrogated hard and he confessed that he had kidnapped Kalpesh with the help of two Rowdy persons.He was taken to the place Kalpesh was kept.Dora Rohan and Police party rescued Kalpesh from the isolated place he was kept.
Criminal case was filed against all culprits. 

Monday, November 20, 2017

Grandma's Stories---1075--Detective Dora !! { 92 }

It was an Indian Marriage.The Baraat {  The procession with groom his relatives and friends }has arrived was welcomed by Bride's Parents.They all were taken inside with respect and offered seats ,snacks and cold drinks. A tall smart young boy named Suresh was center of attraction.Geeta liked him very much and she herself went and talked to him.She said ," I am falling in love with you" Suresh smiled and asked " Do you know who am I ? "I don't need to know who you are ?" 
Next day they met and then they started meeting continuously. Suresh said "I am a property dealer "
She trusted,One person saw  her with Suresh on Motorcycle and he informed her parents.He was the salesman Deenu working at Geeta's father's Deven Gupta's shop.When Geeta came back home father Deven Gupta asked her and she accepted,Deven Gupta asked her" Do you know who is he ? He is a punk crook and criminal and land mafia and already married,she didn't believe " He asked his daughter not to meet him.But she went to meet him and asked him all the questions to clear the misunderstandings,but Suresh said every thing is true.
Even after knowing the truth which was quite bitter,she decided to stay with him in live in relationship.
It was shameful for her parents.After six months,Suresh was arrested in one extortion case.Her parents requested and brought her back home.She was pregnant.
After two days Geeta came to police station and lodged a FIR against her parents.She said her parents gave her some medicine to abort her baby without informing her and she lost her baby.
          Dora went and inquired in all medicine shops,she shown some photographs to the shop keepers to identify the person who bought the medicine.He pointed photograph of a lady.She was Deenu's wife.Deenu confessed that he was just obeying his master who asked to buy that medicine .Deenu and his wife were uneducated and didn't know medicine's use.
Case was filed against all of them.

Dharm & Darshan !! ( 432 )

"*यात्रा एक TEACHER की maa'm से माँ तक*"   ---------------------------एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।
कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको एक आंख नहीं भाता। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता..मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता.कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.धीरे धीरे मिस को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मिस की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण राजू के नाम पर किये जाते. बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। राजू ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता । मिस को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी।
पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो मिस ने राजू की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी । प्रगति रिपोर्ट माता पिता को दिखाने से पहले हेड मिसट्रेस के पास जाया करती थी। उन्होंने जब राजू की रिपोर्ट देखी तो मिस को बुला लिया। "मिस प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे राजू के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।" "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन राजू एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। "मिस घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।
हेड मिसट्रेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ मिस की डेस्क पर राजू की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी । अगले दिन मिस ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह राजू की रिपोर्ट हैं। "पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है। "राजू जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।" "
अंतिम सेमेस्टर में भी राजू ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। "मिस ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।" राजू ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। .उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। "" राजू की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। । घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है.जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। ""
राजू की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही राजू के जीवन की चमक और रौनक भी। । उसे बचाना होगा...इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। "मिस के दिमाग पर भयानक बोझ हावी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की । आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे.
अगले दिन जब मिस कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे राजू के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था । व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल राजू पर दागा और हमेशा की तरह राजू ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक मिस से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने राजू को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा। राजू तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही मिस ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। मिस हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण राजू के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना राजू सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब मिस को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी।
उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और राजू ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास ।
विदाई समारोह में सभी बच्चे मिस के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और मिस की टेबल पर ढेर लग गये । इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये राजू लाया होगा। मिस ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। मिस ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद राजू भी। आखिर राजू से रहा न गया और मिस के पास आकर खड़ा हो गया। ।
कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर मिस को बताया कि "आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"
समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में मिस को राजू से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला।। मगर आप जैसा कोई नहीं था।" फिर राजू का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और मिस रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में राजू का पत्र मिला जिसमें लिखा था:
"इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपके बिना शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात .. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है.........डॉक्टर राजू
साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। मिस खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां पर शादी कराने वाले पंडितजी भी थक गये थे. कि आखिर कौन आना बाकी है...मगर राजू समारोह में शादी के मंडप के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर रहा था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षिका ने गेट से प्रवेश किया राजू उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तों आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।।।........यह मेरी माँ हैं - ------------------------- "
!! प्रिय दोस्तों.... इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा । अपने आसपास देखें, राजू जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता है...........

Grandma's Stories--1074--Detective Dora !! {91}

Nimmi was in love with Charan.Nimmi belong to a rich and renowned family Gurubaksh Singh Chopra ,He owned a big hosiery factory in the town,while Charan belong to a poor & lower family.So when Nimmi disclosed about her love to family members they bluntly denied for that marriage.Charan was ordered by Panchayat { Local Governance Body } to leave the village.He left the village and got married to a simple girl Diya.
Two years passed but Nimmi could not forget Charan and was continuously in touch with Charan.They used to call each other and chat for hours.
One night some thieves entered inside Nimmi's house,but loyal Ramu woke up he started shouting " Thieves Thieves" and then every body woke up.Thieves ran away.
After two months one day Gurubakshsingh asked his wife Gurneet to get two lac rupees from the Almirah's locker,He heard her scream,he ran towards that room,she was standing still,shocked,looking at the locker which was completely empty.
Grubakshsingh called the Police,and lodged FIR,he said cash fifteen lac and jewellery worth twenty lac rupees kept there was stolen.
Dora and Rohan were also informed.They arrived there.Asked questions to each member,came to know about Charan and Nimmi's love story.
Dora and Rohan drove towards Charan's village.They asked their neighbours but found nothing.Dora then talked to Charan's wife Diya.
She accepted that Charan was not in his bed that night.Police Party arrested Charan.During interrogation he confessed that he was among thieves and it was Nimmi's plan,She kept the door opened,They already had stolen and were going back while Ramu woke up.
She wanted to run away with him and start a new life and for that they need money.
Criminal case was filed against all culprits.

Grandma's Stories--1073--Detective Dora !! { 90 }

Sanjay & Vijay were living with their parents,Mr.& Mrs.Gokhle,Sanjay and his wife Vinita were doing Government job and Vijay was helping his father in his ration shop because he was not highly qualified,but his wife Sushmita was working in a office.Sanjay and Vinita didn't have any child but Vijay and Sushmita had a one year son.
Sanjay and Vinita's economical stats was batter than Vijay and Sushmita's because they were earning good.While Vijay used to get scolded by his father.This made him very jealous of his elder brother.
One day a truck dashed Sanjay's motor cycle and he got badly hurt,he went to coma and doctors couldn't tell when will he regain consciousness.F.I.R.was lodged against that unknown truck driver.Dora and Rohan were informed.
The accident happened on the highway,there were no CCTV available around.
Dora talked to each member of the family but could not calculate.She decided to talk to neighbours about the family members and a surprising thing disclosed.
Vijay was seen with a bad man of that area named Dagadu bhai.Dora asked police party to arrest him and do hard interrogation.They did the same and this third degree interrogation broke that hardcore criminal.He confessed that Vijay had given him "Supari"{ Contract } for that accident.
Vijay was arrested.Family members were shocked to hear that.Criminal case was filed against him.

Grandma's Stories--1072 --Rani Padmini !!

महारानी पद्मिनी - चित्तौड़ की रानी थी, रानी पद्मिनि के साहस एवं बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है।
सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रतनसिंह के साथ ब्याही गई थी। १३०२ इश्वी में रानी पद्मिनी का अनिन्द्य सौन्दर्य यायावर गायकों (चारण/भाट/कवियों) के गीतों का विषय बन गया था।
दिल्ली के तात्कालिक सुल्तान अल्ला-उ-द्दीन खिलज़ी ने पद्मिनी के अप्रतिम सौन्दर्य का वर्णन सुना और वह पिपासु हो गया उस सुंदरी को अपने हरम में शामिल करने के लिए।
अल्ला-उ-द्दीन ने चित्तौड़ (मेवाड़ की राजधानी) की ओर कूच किया अपनी अत्याधुनिक हथियारों से लेश सेना के साथ। मकसद था चित्तौड़ पर चढ़ाई कर उसे जीतना और रानी पद्मिनी को हासिल करना। ज़ालिम सुलतान बढा जा रहा था, चित्तौड़गढ़ के नज़दीक आये जा रहा था।
उसने चित्तौड़गढ़ में अपने दूत को इस पैगाम के साथ भेजा कि, अगर उसको रानी पद्मिनी को सुपुर्द कर दिया जाये तो वह मेवाड़ पर आक्रमण नहीं करेगा। रणबाँकुरे राजपूतों के लिए यह सन्देश बहुत शर्मनाक था।
उनकी बहादुरी कितनी ही उच्चस्तरीय क्यों ना हो, उनके हौसले कितने ही बुलंद क्यों ना हो, सुलतान की फौजी ताक़त उनसे कहीं ज्यादा थी।
रणथम्भोर के किले को सुलतान हाल ही में फतह कर लिया था ऐसे में बहुत ही गहरे सोच का विषय हो गया था सुल्तान का यह घृणित प्रस्ताव, जो सुल्तान की कामुकता और दुष्टता का प्रतीक था। कैसे मानी ज सकती थी यह शर्मनाक शर्त ..!!
नारी के प्रति एक कामुक नराधम का यह रवैय्या क्षत्रियों के खून खौला देने के लिए काफी था ..!!
रतन सिंह जी ने सभी सरदारों से मंत्रणा की, कैसे सामना किया जाय इस नीच लुटेरे का जो बादशाह के जामे में लिपटा हुआ था। कोई आसान रास्ता नहीं सूझ रहा था। मरने मारने का विकल्प तो अंतिम था।
क्यों ना कोई चतुराईपूर्ण राजनीतिक कूटनीतिक समाधान समस्या का निकाला जाय ?
*महारानी पद्मिनी न केवल अनुपम सौन्दर्य की स्वामिनी थी, वह एक बुद्धिमता नारी भी थी ..!!*
उसने अपने विवेक से स्थिति पर गौर किया और एक संभावित हल समस्या का सुझाया ..!!
अल्ला-उ-द्दीन को जवाब भेजा गया कि, वह अकेला निरस्त्र गढ़ (किले) में प्रवेश कर सकता है, बिना किसी को साथ लिए, राजपूतों का वचन है कि, उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा .. हाँ वह केवल रानी पद्मिनी को देख सकता है ..!!
बस, उसके पश्चात् उसे चले जाना होगा चित्तौड़ को छोड़ कर .. जहाँ कहीं भी ..!!
उम्मीद कम थी कि, इस प्रस्ताव को सुल्तान मानेगा ...!!!
किन्तु आश्चर्य हुआ जब दिल्ली के आका ने इस बात को मान लिया,
निश्चित दिन को अल्ला-उ-द्दीन पूर्व के चढ़ाईदार मार्ग से किले के मुख्य दरवाज़े तक चढ़ा, और उसके बाद पूर्व दिशा में स्थित सूरजपोल तक पहुंचा ..!!
अपने वादे के मुताबिक वह नितान्त अकेला और निरस्त्र था। पद्मिनी के पति रावल रतन सिंह ने महल तक उसकी अगवानी की ..!!!
महल के उपरी मंजिल पर स्थित एक कक्ष की पिछली दीवार पर एक दर्पण लगाया गया, जिसके ठीक सामने एक दूसरे कक्ष की खिड़की खुल रही थी … उस खिड़की के पीछे झील में स्थित एक मंडपनुमा महल था जिसे रानी अपने ग्रीष्म विश्राम के लिए उपयोग करती थी ...
रानी मंडपनुमा महल में थी जिसका बिम्ब खिडकियों से होकर उस दर्पण में पड़ रहा था अल्लाउद्दीन को कहा गया कि, दर्पण में झांके ..!!!
हक्केबक्के सुलतान ने आईने की जानिब अपनी नज़र की और उसमें रानी का अक्स उसे दिख गया … तकनीकी तौर पर .. उसे रानी साहिबा को दिखा दिया गया था ...
सुल्तान को एहसास हो गया कि, उसके साथ चालबाजी की गयी है, … किन्तु बोल भी नहीं पा रहा था, मेवाड़ नरेश ने रानी के दर्शन कराने का अपना वादा जो पूरा किया था …!!! और उस पर वह नितान्त अकेला और निरस्त्र भी था। परिस्थितियां असमान्य थी, किन्तु एक राजपूत मेजबान की गरिमा को अपनाते हुए, दुश्मन अल्लाउद्दीन को ससम्मान वापस पहुँचाने मुख्य द्वार तक स्वयं रावल रतन सिंह जी गये थे …!! अल्लाउद्दीन ने तो पहले से ही धोखे की योजना बना रखी थी ... उसके सिपाही दरवाज़े के बाहर छिपे हुए थे .. दरवाज़ा खुला ..!! रावल साहब को जकड लिया गया और उन्हें पकड़ कर शत्रु सेना के खेमे में कैद कर दिया गया ... रावल रतन सिंह दुश्मन की कैद में थे .. अल्लाउद्दीन ने फिर से पैगाम भेजा गढ़ में कि, राणाजी को वापस गढ़ में सुपुर्द कर दिया जायेगा, अगर रानी पद्मिनी को उसे सौंप दिया जाय! चतुर रानी ने काकोसा गोरा और उनके १२ वर्षीय भतीजे बादल से मशविरा किया और एक चातुर्यपूर्ण योजना राणाजी को मुक्त करने के लिए तैयार की ..!!
अल्लाउद्दीन को सन्देश भेजा गया कि, अगले दिन सुबह रानी पद्मिनी उसकी खिदमत में हाज़िर हो जाएगी, दिल्ली में चूँकि उसकी देखभाल के लिए उसकी खास दसियों की ज़रुरत भी होगी, उन्हें भी वह अपने साथ लिवा लाएगी ..!!
प्रमुदित अल्लाउद्दीन सारी रात्रि सो न सका …!! कब रानी पद्मिनी आये उसके हुज़ूर में, कब वह विजेता की तरह उसे भी जीते ..!! और कल्पना करता रहा रात भर पद्मिनी के सुन्दर तन की ….!! प्रभात बेला में उसने देखा कि, एक जुलुस सा सात सौ बंद पालकियों का चला आ रहा है ..!!
खिलज़ी अपनी जीत पर इतरा रहा था ..
खिलज़ी ने सोचा था कि, ज्योंही पद्मिनी उसकी गिरफ्त में आ जाएगी, रावल रतन सिंह का वध कर दिया जायेगा … और चित्तौड़ पर हमला कर उस पर कब्ज़ा कर लिया जायेगा .. कुटिल हमलावर इस से ज्यादा सोच भी क्या सकता था .. खिलज़ी के खेमे में इस अनूठे जुलूस ने प्रवेश किया, और तुरंत अस्तव्यस्तता का माहौल बन गया … पालकियों से नहीं उतरी थी अनिन्द्य सुंदरी रानी पद्मिनी और उसकी दासियों का झुण्ड … बल्कि पालकियों से कूद पड़े थे हथियारों से लेश रणबांकुरे राजपूत योद्धा …. जो अपनी जान पर खेल कर अपने राजा को छुड़ा लेने का ज़ज्बा लिए हुए थे ..!!
वीर गोरा और बादल भी इन में सम्मिलित थे। मुसलमानों ने तुरत अपने सुल्तान को सुरक्षा घेरे में लिया .. रतन सिंह जी को उनके आदमियों ने खोज निकाला और सुरक्षा के साथ किले में वापस ले गये .. घमासान युद्ध हुआ, जहाँ दया करुणा को कोई स्थान नहीं था.. मेवाड़ी और मुसलमान दोनों ही रण-खेत रहे ... मैदान इंसानी लाल खून से सुर्ख हो गया था .. शहीदों में गोरा और बादल भी थे, जिन्होंने मेवाड़ के भगवा ध्वज की रक्षा के लिए अपनी आहुति दे दी थी ..
अल्लाउद्दीन की खूब मिटटी पलीद हुई .. खिसियाता, क्रोध में आग बबूला होता हुआ, लौमड़ी सा चालाक और कुटिल सुल्तान दिल्ली को लौट गया .. उसे चैन कहाँ था, जुगुप्सा का दावानल उसे लगातार जलाए जा रहा था। एक औरत ने उस अधिपति को अपने चातुर्य और शौर्य से मुंह के बल पटक गिराया था। उसका पुरुष चित्त उसे कैसे स्वीकार का सकता था … उसके अहंकार को करारी चोट लगी थी … मेवाड़ का राज्य उसकी आँख की किरकिरी बन गया था। कुछ महीनों के बाद वह फिर चढ़ बैठा था चित्तौडगढ़ पर, ज्यादा फौज और तैय्यारी के साथ .. उसने चित्तौड़गढ़ के पास मैदान में अपना खेमा डाला ..!! किले को घेर लिया गया … किसी का भी बाहर निकलना सम्भव नहीं था … दुश्मन की फौज के सामने मेवाड़ के सिपाहियों की तादाद और ताक़त बहुत कम थी। थोड़े बहुत आक्रमण शत्रु सेना पर बहादुर राजपूत कर पाते थे लेकिन उनको कहा जा सकता था ऊंट के मुंह में जीरा ..!! सुल्तान की फौजें वहां अपना पड़ाव डाले बैठी थी, इंतज़ार में .. छः महीने बीत गये, किले में संगृहीत रसद भी ख़त्म होने को आई !!अब एक ही चारा बचा था, “करो या मरो.” या “घुटने टेको.” आत्मसमर्पण या शत्रु के सामने घुटने टेक देना बहादुर राजपूतों के गौरव लिए अभिशाप तुल्य था,
ऐसे में बस एक ही विकल्प बचा था झूझना ..युद्ध करना ..शत्रु का यथा संभव संहार करते हुए वीरगति को पाना ...बहुत बड़ी विडंबना थी कि, शत्रु के कोई नैतिक मूल्य नहीं थे। वे न केवल पुरुषों को मारते काटते, नारियों से बलात्कार करते और उन्हें भी मार डालते .. यही चिंता समायी थी धर्म परायण शिशोदिया वंश के राजपूतों में ..!!!
मेवाड़ियों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया .. किले के बीच स्थित मैदान में लकड़ियों, नारियलों एवम् अन्य इंधनों का ढेर लगाया गया ..सारी स्त्रियों ने, रानी से दासी तक, अपने बच्चों के साथ गोमुख कुन्ड में विधिवत पवित्र स्नान किया ….सजी हुई चित्ता को घी, तेल और धूप से सींचा गया ….और पलीता लगाया गया ..!!
चित्ता से उठती लपटें आकाश को छू रही थी …
नारियां अपने श्रेष्ठतम वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित थी….!!! अपने पुरुषों को अश्रुपूरित विदाई दे रही थी ..अंत्येष्टि के शोक गीत गाये जा रही थी .. अफीम अथवा ऐसे ही किसी अन्य शामक औषधियों के प्रभाव से प्रशांत हुई, महिलाओं ने रानी पद्मावती के नेतृत्व में चित्ता की ओर प्रस्थान किया ..और कूद पड़ी धधकती चित्ता में ...अपने आत्मदाह के लिए ...जौहर के लिए ...देशभक्ति और गौरव के उस महान यज्ञ में अपनी पवित्र आहुति देने के लिए।
जय एकलिंग, हर हर महादेव के उदघोषों से गगन गुंजरित हो उठा था .. आत्माओं का परमात्मा से विलय हो रहा था ..!!!
अगस्त २५, १३०३ की भोर थी, आत्मसंयमी दुःख सुख को समान रूप से स्वीकार करने वाला भाव लिए, पुरुष खड़े थे उस हवन कुन्ड के निकट, कोमलता से श्रीमद्भगवद गीता के श्लोकों का कोमल स्वर में पाठ करते हुए …अपनी अंतिम श्रद्धा अर्पित करते हुए ….प्रतीक्षा में कि, वह विशाल अग्नि उपशांत हो ..
पौ फट गयी ..सूरज की लालिमा ताम्रवर्ण लिए आकाश में आच्छादित हुई ..
पुरुषों ने *केसरिया* बाघे पहन लिए ..
अपने अपने भाल पर जौहर की पवित्र भभूत से टीका *तिलक* किया ….मुंह में प्रत्येक ने तुलसी का पता रखा ….दुर्ग के द्वार खोल दिए गये ..!!!!!
*जय एकलिंग*….
*हर हर महादेव* की हुंकार लगते रणबांकुरे मेवाड़ी टूट पड़े शत्रु सेना पर …मरने मारने का ज़ज्बा था … आखरी दम तक अपनी तलवारों को शत्रु का रक्त पिलाया … और स्वयं लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गये ..!!! अल्लाउद्दीन खिलज़ी की जीत उसकी हार थी, क्योंकि, उसे रानी पद्मिनी का शरीर हासिल नहीं हुआ, मेवाड़ की पगड़ी उसके कदमों में नहीं गिरी ...चातुर्य और सौन्दर्य की स्वामिनी रानी पद्मिनी ने उसे एक बार और छल लिया था ..!! ऐसी थी अमर वीरांगना रानी पद्मावती। हिंदुस्तान की नारी का गौरव थी
रानी पद्मावती।

Sunday, November 19, 2017

Grandma's Stories---1071---Detective Dora !! { 89 }

Shreya was living with her uncle and Aunt since her childhood as she lost her parents in an accident,at the age of ten.Uncle Aunt had a daughter Anita ,one year older to Shreya.When Shreya arrived Anita started feeling Jealous,as now her parents were taking care of Shreya too.As she grew up her hatred became deeper.Parents wanted Anita to marry a well established engineer,so they called the family.The boy liked her and the marriage was fixed.
Parents started doing shopping for the marriage.They bought costly Jewellery first.
Next day both of them went to Varanasi to buy sarees,and that night a crime happened in their house.All the Jewellery stolen and Anita was physically assaulted,when Mom and Dad arrived back they wanted to lodge F.I.R. but Anita stopped them to do this.
Actually Anita was in relationship with a middle age married man.He was a history sheeter.Anita her self stole the Jewellery and gave him to sell.She hid one Necklace in Shreya's Wardrobe and blamed her that she had stolen it.Shreya also had a boyfriend named Mukesh and was a good man.His wallet was found laying on the ground exactly outside the window,through which the theft occurred.
Anita slapped Shreya that she and her boyfriend have done the crime together.
Shreya felt bad,she decided to leave the place,she asked her friend to find a job for her.Her friend suggested her to call Dora.She agreed.She went herself to meet Dora.Dora went to Mukesh with her,Mukesh said he is innocent he showed the F.I.R.copy he lodged when his wallet was stolen.
Dora understood that Shreya and Mukesh were trapped systemically.She then asked Shreya to keep keen eye on Anita and if she goes out follow her and continuously send the locations.
Shreya started doing this.Her Uncle and Aunt were annoyed with her as all the proofs were against her.Shreya didn't give up.She saw Anita was going out,She sent location to Dora and Mukesh too.Dora and Rohan drove towards,and Mukesh was following with the Police Party.Shreya recorded their conversation which was actually their confession.They were arrested and criminal case was filed against them