Tuesday, February 20, 2018

Dha & Darshan !! (448)

एक मछलीमार काँटा डालकर
 तालाब के किनारे बैठा था !
काफी समय बाद भी कोई मछली काँटे में
 नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई , तो
वह सोचने लगा... कहीं ऐसा तो नहीं कि
 मैंने काँटा गलत जगह डाला है,
  यहाँ कोई मछली ही न हो !
        उसने तालाब में झाँका तो देखा कि
        उसके काँटे के आसपास तो बहुत-सी
         मछलियाँ थीं ! उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि
          इतनी मछलियाँ होने के बाद भी
           कोई मछली फँसी क्यों नहीं !
एक राहगीर ने जब यह नजारा देखा , तो
 उससे कहा ~ लगता है भैया ! यहाँ पर
  मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो !
     अब इस तालाब की मछलियाँ
          काँटे में नहीं फँसतीं !
           मछलीमार ने हैरत से पूछा ~
            क्यों ... ऐसा क्या है यहाँ ?
राहगीर बोला ~ पिछले दिनों तालाब के
         किनारे एक बहुत बड़े संत ठहरे थे !
          उन्होने यहाँ मौन की महत्ता पर
            प्रवचन दिया था !
 उनकी वाणी में इतना तेज था कि
 जब वे प्रवचन देते तो सारी मछलियाँ भी
           बड़े ध्यान से सुनतीं !
  यह उनके प्रवचनों का ही असर है , कि
             ... उसके बाद ...
      जब भी कोई इन्हें फँसाने के लिए
        काँटा डालकर बैठता है , तो
         ये मौन धारण कर लेती हैं !
       जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं , तो
              काँटे में फँसेगी कैसे ?
       इसलिए ... बेहतर यहीं होगा कि
    आप कहीं और जाकर काँटा डालो !
           
         परमात्मा ने हर इंसान को ...
       दो आँख, दो कान, दो नासिका,
      हर इन्द्रिय दो-दो ही प्रदान करी हैं ,
                ... लेकिन ...
             जिह्वा एक ही दी है !
           क्या कारण रहा होगा ?
 क्योंकि ...  यह एक ही अनेकों भयंकर
परिस्थितियाँ पैदा करने के लिये पर्याप्त है !
   संत ने कितनी सही बात कही है , कि
       जब मुँह खोलोगे ही नहीं , तो ...
                फँसोगे कैसे ?
अगर इन्द्रिय पर संयम करना चाहते हैं , तो
       इस जिह्वा पर नियंत्रण कर लो ...
   बाकी सब इन्द्रियाँ स्वयं नियंत्रित रहेंगी !
                यह बात हमें भी
      अपने जीवन में उतार लेनी चाहिए !
           ~  एक चुप ~ सौ सुख  ~

Dharm & Darshan !! (447)

*हवन का महत्व*
_________________________________

फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः

आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।
गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।
टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।
हवन की महत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च की । क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है ?अथवा नही ? उन्होंने ग्रंथों  में वर्णिंत हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया कि ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा कि सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए । पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया।
यही नहीं  उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।
यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है ।
अगर चाहें तो अपने परिजनों को इस जानकारी से अवगत कराए । हवन करने से न सिर्फ भगवान ही खुश होते हैं बल्कि घर की शुद्धि भी हो जाती है ।भगवान सभी परिजनों को सुरक्षा एवं समृद्धि  प्रदान करें ।

Anmol Moti !! {13 }

चतुराई --चतुराई दरबारियों के लिए गुण है ,साधुओं के लिए दोष 
--शेख सादी 
सबसे बड़ी चतुराई यह है कि कोई चतुराई न की जाय ---फ़्रांसिसी कहावत 
चरित्र --चरित्र के बिना ज्ञान बुराई की ताकत बन जाता है जैसा कि  दुनिया के कितने ही चालाक चोरों और भले मानुष बदमाशों के उदहारण से स्पष्ट है --गाँधी 
दुर्बल चरित्र का व्यक्ति उस सरकंडे जैसा है जो हवा के हर मौके पर झुक जाता है --माघ 
चरित्र मनुष्य के अंदर रहता है यश उसके बाहर --अज्ञात 
चरित्र वृक्ष है प्रतिष्ठा छाया --अब्राहम लिंकन 
श्वास की क्रिया के समान हमारे चरित्र में एक ऐसी सहज क्षमता होनी चाहिए जिसके बल पर जो कुछ प्राप्य है वह अनायास ग्रहण कर लें तथा जो कुछ त्याज्य है वह बिना क्षोभ के त्याग सकें --टैगोर 
समाज के प्रचलित विधि विधानों के उल्लंघन का दुःख केवल चरित्रबल पर ही सहन किया जा सकता है --शरतचंद्र 
कठिनाइयों को जीतने वासनाओं का दमन करने और दुखों को सहन करने से चरित्र उच्च सुदृढ़ और निर्मल होता है --अज्ञात 
चापलूसी --जब निष्कपट व्यवहार को दरवाजे से बाहर धकेल दिया जाता है तो चापलूसी बैठक में आ बैठती है --अंग्रेजी कहावत 
चापलूस आपको हानि पहुंचा कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहता हूँ --हरिऔध 
चापलूसी तीन घोर घृणित दुर्गुणों से बानी है --असत्य,दासत्व ,और विश्वासघात --अज्ञात 
चापलूस उन बिल्लियों की तरह है जो सामने से चाटती हैं और पीछे से खसोटती हैं --जर्मन कहावत 
चापलूस इसलिए आपकी चापलूसी करता है क्योंकि वह आपको अयोग्य समझता है लेकिन आप उसके मुंह से अपनी प्रशंसा सुन कर फुले नहीं समाते --टॉलस्टॉय 
रहीमन जो रहिबो चहै ,कहे वही के दांव ,
जो वासर को निसि कहै तो कचपची दिखाव 

Anmol Moti !! { 12 }

गरीबी -- गरीबी लज्जा नहीं है लेकिन गरीबी से लज्जित होना लज्जा की बात है --कहावत 
निर्धनता से मनुष्य को लज्जा होती है लज्जा से पराक्रम नष्ट हो जाता है अपमान से दुःख मिलता है दुःख से शोक होता है और फिर बुद्धि नष्ट हो जाती है इस प्रकार निर्धनता आपत्तियों का घर है --हितोपदेश 
जो गरीबों पर दया करता है वह अपने कार्र्य से ईश्वर को ऋणी बनता है--गाँधी 
उस मनुष्यसे अधिक गरीब कोई नहीं जिसके पास केवल धन है --कहावत 
गलती --गलती करना मनुष्य का स्वभाव है।  की हुई गलती को मान लेना और इस प्रकार आचरण करना की वह गलती फिर से न होने पाए मर्दानगी है --गाँधी जो मान गया की उससे गलती हो गई और उसे ठीक नहीं करता वह एक और गलती कर रहा है --कन्फ्यूशियस 
बहुत सी तथा बड़ी गलतियां किये बिना कोई व्यक्ति महान नहीं बनता --ग्लैडस्टोन 
अगर तुम गलतियों को रोकने के लिए दरवाजे बंद कर दोगे तो सत्य भी बाहर रह जाएगा --टैगोर 
गलती यद्यपि स्वयं अंधी है तथापि वह ऐसी संतान उत्पन्न करती है जो देख सकती है --कहावत 
गुण--गुणों से ही मनुष्य महान होता है ऊँचे आसमान पर बैठने से नहीं महल के ऊँचे शिखर पर बैठने से कौआ गरूड़ नहीं बनता  --चाणक्य 
सदगुण शीलता  मुंसिफ मिजाज़ और अक्लमंद आदमी जब  तक  ख़ामोशी नहीं होती --शेख सादी 
कस्तूरी को अपनी मौजूदगी कसम खाकर सिद्ध नहीं करनी पड़ती --अज्ञात 
रूप की पहुँच आँखों तक है गुण आत्मा को जीतते हैं --पोप 
बड़े बड़ाई ना करे ,बड़े ना बोले बोल ,रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मेरा मोल 
गुरु --- कबीरा ते नर अंध हैं ,गुरु को मानत और ,हरी रूठे गुरु ठौर है ,गुरु रूठे नहीं ठौर --कबीर 
सच्चा गुरु अनुभव है --विवेकानंद 
शिष्य के ज्ञान पर सही करना यही गुरु का काम है बाकी के लिए शिष्य स्वावलम्बी है --विनोबा 
घृणा --घृणा पाप से करो पापी से नहीं 
जो सच्चाई पर निर्भर हैं वह किसी से घृणा नहीं करता --नेपोलियन 
घृणा और प्रेम दोनों अंधे हैं --कहावत 
घृणा हृदय का पागलपन है --बायरन 
घृणा घृणा से काम नहीं होती प्रेम से होती है --बुद्ध 


Grandma's Stories---1134-- Detective Dora !! { 143 }

Silvia was a Polish girl. She came to India ,fell in love with Naresh and got married with him.He was just an auto driver,and was a poor man,younger to Silvia.He was living in a small house with his parents. He was the only son and only earning member of the family.When Naresh came home after wedding in a temple,with Silvia,his parents shocked,but they didn't oppose.Within a month disputes started between Naresh's parents and Silvia.Both the parents were expecting her behaving like an Indian bride.They didn't like her way to dress up.Naresh used to be at work all day long.One day Naresh's mother slapped Silvia,she couldn't tolerate and packed her suitcase,came out and hired an auto.
Luckily Naresh saw her on the way he stopped the auto,requested to get down and then both of them went in Naresh's auto.But they didn't reach home.Naresh's parents waited that night and next morning lodged their missing complaint.
Dora and Rohan were informed.This was a very delicate matter because it was concerned with a Foreigner girl.
Dora & Rohan reached Naresh's house.They did a minute search,but didn't find any concerned thing.Suddenly her phone rang,some body was reporting,"A suitcase is found at sea beach" Dora Rohan and the police party reached there.It was Silvia's suitcase.Dora opened it,found her passport,which showed that it was her third visit to India.
Dora already got her phone number,they checked all the call details.One number was mostly dialed and similarly calls received by it.Dora Rohan and the Police Party inquired about it.It was a Person named Vicky Arora ,was a person,promote boys and girls to T.V. serials or Advertisement Agencies or films.
When They all reached to his office hr was shocked.When Dora asked her about Silvia he said " Yes she came and asked me for a role in films,but I did not any role for her so I denied but this thing happened three years ago.After that I didn't see her"
Rohan slapped him hard " Three years ago ? Just have a look,He showed him the call details"He was then brought to the Police station and interrogated hard.
He had to reply now ,He said ," Yes I was in touch with her.I liked her.But I couldn't give her any work.When she got married to Naresh I felt Jealous." Yesterday when after domestic violence she called me,I asked her to wait for me,but I saw her going with Naresh.When the auto reached near me I stopped them.I also joined them.I tried to solve their problems but they were quarreling.
Then what ? asked Dora ,She understood he was making story." He was silent.Dora went out of the room and Police started asking him.Dora and Rohan went to Vicky's office,Dora found a hidden door behind a shelf, downstairs were going to a basement.Both of them quickly climbed down and found Silvia and Naresh tied to chairs.They were rescued.Police Party arrived there.Criminal case was filed against Vicky Arora. 

Monday, February 19, 2018

Dharm & Darshan !! (446 )

*महामृत्युंजय मंत्र की ऊर्जा के आगे बेबस हुआ क्वांटम मशीन का मीटर*

( बिहार योग के संशोधन का वार्तांकन )

चेतना, जो कि ऊर्जा की विवेकपूर्ण व संपूर्ण अभिव्यक्ति है, आज भी विज्ञान के लिए एक अबूझ पहेली है। कृत्रिम बुद्धि यानी आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस तो विज्ञान ने रच ली है, लेकिन चेतना को पढ़ पाना भी अभी दूर की बात है, इसकी रचना का तो प्रश्न भी नहीं उठता।

चेतना को समझा अवश्य जा सकता है, भारतीय योगी-मनीषी इसका अभ्यास सदियों से करते आए हैं। मुंगेर, बिहार स्थित दुनिया के प्रथम योग विश्वविद्यालय में मानसिक ऊर्जा के विविध आयामों को पढ़ने के लिए उच्चस्तरीय शोध जारी है। प्रस्तुत है नई दिल्ली से अतुल पटैरिया की रिपोर्ट।


जुटे हैं दुनिया के 50 विश्वविद्यालयों के 500 वैज्ञानिक-

दुनिया के चुनिंदा 50 विश्वविद्यालयों और क्वांटम फिजिक्स पर शोध करने वाली वैश्विक शोध संस्थाओं के 500 वैज्ञानिक इस शोध पर एक साथ काम कर रहे हैं, विषय है- टेलीपोर्टेशन ऑफ क्वांटम एनर्जी, यानी मानसिक ऊर्जा का परिचालन व संप्रेषण।

इस शोध के केंद्र में भारतीय योग व ध्यान परंपरा का नादानुसंधान अभ्यास भी है, जिसे नाद रूपी प्राण ऊर्जा यानी चेतना के मूल आधार तक पहुंचने का माध्यम माना जाता है। बिहार योग विश्वविद्यालय के परमाचार्य पदम भूषण परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती इस शोध में मुख्य भूमिका में हैं।

मंत्रों में निहित ऊर्जा को पढ़ने का प्रयत्न-

स्वामी निरंजन बताते हैं कि यह मंत्र विज्ञान भी शोध के केंद्र में है। प्रत्येक मंत्र के मानसिक व बाह्य उच्चारण से उत्पन्न ऊर्जा को क्वांटम मशीन के जरिये मापा गया है। मानसिक संवाद, परह्रद संवेदन या दूरानुभूति जिसे अंग्र्रेजी में टेलीपैथी कहते हैं, यह विधा भारतीय योग विज्ञान का विषय रही है। मानसिक ऊर्जा के परिचालन और संप्रेषण को वैज्ञानिक आधार पर समझने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वामी निरंजन कहते हैं, संभव है कि आने वाले कुछ सालों में एक ऐसा मोबाइल सेट प्रस्तुत कर दिया जाए, जिसमें न तो नंबर मिलाने की आवश्यकता होगी, न बोलने की और न ही कान लगाकर सुनने की।

महामृत्युंजय मंत्र में सर्वाधिक ऊर्जा-

57 वर्षीय स्वामी निरंजनानंद सरस्वती बताते हैं कि क्वांटम मशीन में विविध मंत्रों के मानसिक और बाह्य उच्चारण के दौरान उनसे उत्पन्न ऊर्जा को क्वांटम मशीन के माध्यम से मापा गया। स्वामी निरंजन बताते हैं कि इस शोध के लिए विशेष रूप से तैयार की गई क्वांटम मशीन विज्ञान जगत में अपने तरह का अनूठा यंत्र है, जिसे मुंगेर स्थित योग विश्वविद्यालय के योग रिसर्च सेंटर में लाया गया।

इसके सम्मुख जब महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण किया गया तो इतनी अधिक ऊर्जा उत्पन्न हुई कि इसमें लगे मीटर का कांटा अंतिम बिंदु पर पहुंचकर फड़फड़ाता रह गया। गति इतनी तीव्र थी कि यह मीटर यदि अर्द्धगोलाकार की जगह गोलाकार होता तो कांटा कई राउंड घूम जाता। सामूहिक उच्चारण करने पर तो स्थिति इससे भी कई गुना अधिक आंकी गई। महामृत्युंजय मंत्र के अलावा, गायत्री मंत्र और दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला का स्त्रोत अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करने वाला साबित हुआ।

ऊर्जा को संकल्प शक्ति की ओर मोड़ दें-

परमहंस स्वामी निरंजन कहते हैं इन तीन मंत्रों का जप प्रतिदिन सुबह उठकर और रात्रि में सोने से पहले सात-सात बार अवश्य करना चाहिये। इनके पाठ या जप से उत्पन्न ऊर्जा को मानसिक संकल्प लेकर संकल्प शक्ति में परिवर्तित कर देने से वांछित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से पूर्व सतत आरोग्य का संकल्प, गायत्री मंत्र से पहले प्रज्ञा के सुप्त क्षेत्रों को जागृत करने का संकल्प और दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला के तीन बार स्त्रोत से पूर्व जीवन से दुर्गति को दूर करने, जीवन में शांति, प्रेम व सद्भाव की स्थापना का संकल्प लेना चाहिये।

तब हम चेतना को अभिव्यक्त कर सकते हैं...-

स्वामी निरंजन कहते हैं, जहां ऊर्जा है, वहां गति होगी, वहां कंपन होगा, और कंपन से ध्वनि होगी। कुछ ध्वनियां हैं, जो हमारे कानों के श्रवण परास से नीचे हैं, तो कुछ उससे ऊपर। ये कंपन भौतिक या प्राणिक शरीर तक ही सीमित नहीं होते हैं, ये मन, भावना और बुद्धि जगत में भी विद्यमान होते हैं। जब हम चिंतन करते हैं तो मन के अंदर तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो कंपन और ध्वनियां पैदा करती हैं। भारतीय योग विज्ञान में इसे नाद कहा गया है। नाद का अर्थ है चेतना का प्रवाह।

विज्ञान भी इससे पूर्णतः सहमत है-

कि संसार की सभी चीजें कंपनीय ऊर्जा की सतत क्रियाएं हैं। यदि हम मानसिक-तरंग-प्रतिरूप को पुनर्संयोजति, पुनर्स्थापित और प्रेषित कर सकें, तब हम चेतना को अभिव्यक्त कर सकते हैं।

Anmol Moti { 11 }

कुरूपता ---मेरे दोस्त ! किसी चीज को कुरूप न कहो सिवाय  उस भय के जैसी मारी कोई आत्मा स्वयं अपनी स्मृतियों से डरने लगे --खलील जिब्रान 
कुरूपता मनुष्यों की सौंदर्य विद्या है ---चाणक्य 
क्रोध --क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है ,मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है बुद्धि का नाश हो जाता है तथा मनुष्य स्वयं नष्ट हो जाता है ---भगवन कृष्ण
क्रोध यमराज है --चाणक्य 
क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन है --गाँधी 
जो मनुष्य क्रोधी पर क्रोध नहीं करता क्षमा करता है वह अपनी और क्रोध करने वाले की महा संकट से रक्षा करता है वह दोनों का रोग दूर करने वाला चिकित्सक है  --वेदव्यास 
सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिंता से एक घंटे में थक जाता है --जेम्स एलन
क्रोध में की गई बातें  अंत में उलटी निकलती हैं --मीनेंडर 
क्रोध में हों तो बोलने से पहले दस तक गिनो ,यदि बहुत क्रोध में हो तो सौ तक --जेफरसन 
क्षमा --क्षमा ब्रम्ह है क्षमा सत्य है क्षमा भूत है क्षमा भविष्य है क्षमा तप है क्षमा पवित्रता है क्षमा ने ही सम्पूर्ण जगत को धारण कर रख है--वेदव्यास 
वृक्ष अपने काटने वाले को भी क्षमा कर देता है --चैतन्य 
क्षमा कर देना दुश्मन पर विजय पा लेना है --
दूसरे का अपराध सहन कर अपराधी पर उपकार करना यह क्षमा का गुण पृथ्वी से सीखना और पृथ्वी पर सदा परोपकार रत रहने वाले पर्वत और वृक्षों से परोपकार की दीक्षा लेना--भगवान्  कृष्ण मांगने से पूर्व ही क्षमा करना मनुष्य का अपमान करना है ---शरतचंद्र 
ख्याति --ख्याति की अभिलाषा वह पोषाक  है  जिसे ज्ञानी मनुष्य भी सबसे अंत में उतारते हैं --कहावत 
ख्याति वह प्यास है जो कभी नहीं बुझती अगस्त्य ऋषि की तरह सागर पीकर भी शांत नहीं होती --प्रेमचंद 
किसी पूर्वतन ख्याति का उत्तराधिकार प्राप्त करना एक संकट मोल लेना है ----टैगोर