मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

Halahal Se : By Nirupama Sinha !! Utkhanan !! {6}

उत्खनन---------
 
जैसे ही आता है निर्णय,
मिट जाते हैं तब सब संशय,
पल में परिवर्तित हो जाता है,
पूर्व द्रश्य और पूर्व समय।
 
कहीं उड़े अबीर गुलाल,
कोई मन में लिए मलाल,
कहीं नाच और ढोल धमाल,
कोई नोच रहा है बाल,
 
जब परिद्रश्य होता नवीन,
सपने होते हैं रंगीन,
अभिलाषाएं आशाएं उनसे,
जो निर्वाचित सत्तासीन।
 
कश्मीर से कन्या कुमारी,
विशाल देश जनसँख्या भारी,
कुछ ही उम्मीदें पूरीं होतीं,
सारी साधें रहें अधूरी।
 
जनता की शक्ति अमोघ,
किसे उठा दे,किसे गिर दे,
किसकी वे सरकार बना दे,
किसे ताज दें,किसको जोग।
 
किन्तु करे क्या जनता बेचारी,
चुने जिसे वही निकले चोर,
चोर चोर का शोर मचे,
यह भी चोर वह भी चोर।
 
धूर्त नेता लुभावने नारे,
जाल में फंस जाते बेचारे,
किन्तु कई समझदार मतदाता,
दिन में दिखा देते हैं तारे।
 
अर्ध शताब्दी के लम्बे युग में,
शायद कुछ ऐसे नेता हों,
सच्चे सेवक और हित चिन्तक,
दिया जिन्होंने स्वच्छ प्रशासन।
 
मन में सुन्दर बनी कल्पना,
विकसित भारत बने सलौना,
सारी दुनिया का हो जेष्ठ,
गर्व करें भारत है श्रेष्ठ।
 
हर मन में एक ही है आशा,
दिखलाई तो पड़े विकास,
शीघ्र बने यह विकसित राष्ट्र 
होने लगे ऐसा आभास।
 
ऊँचा उठे मस्तक हमारा,
लज्जित न हों करें गर्व,
ऊँची श्रेणी में हो गणना ,
हम कह पायें यही सगर्व।
 
बढ़ें योग्य और पढ़ें योग्य,
कमजोर वर्ग को इसी प्रयोजन,
सही रूप से मिले शिक्षा,
और नौकरी में आरक्षण।
 
परिश्रमी अधिकाँश हैं जन,
धनवान हों चाहे निर्धन,
चाहे हो कठोरतम जीवन,
कर्मठ जुटे रहते हैं हरदम।
 
विश्व के सारे देश समझ गए ,
जान गए भारत की शक्ति,
गति देख प्रगति की सबने,
खोल व्यापार छोड़ दी सख्ती।
 
नौकरियों में अच्छे अवसर,
पाने लगा है भारत वासी,
विश्व के लगभग सब देशों ,
में बसे अनिवासी भारतवासी।
 
जितने भी जाते दूर देश,
छोड़ कर अपना स्वदेश,
बढ़ातें हैं वे देश की शान,
विश्व में इसका सम्मान।
 
उनके डॉलर पाउंड के कारण ,
बढा रुपैया जो था सस्ता,
डगमग डगमग अब ना डोले,
देश की मजबूत अर्थ व्यवस्था।
 
मूल रूप से कृषि प्रधान,
गति प्रगति कर अनुसन्धान,
बढे गुणवत्ता और आकार,
फसलों का हो विकसित विज्ञान।
 
उद्योग बढ़ें बढ़ें उत्पादन,
बढ़ें आयात और निर्यात,
बना रहा कमजोर सदा जो,
भारत का अर्थ बढे अफरात।
 
शिक्षा का हो पूर्ण प्रसार,
सब जागरूक सब समझदार,
अशिक्षित अज्ञानी ना कोई हो,
पढ़ लिख कर जीवन करें संवार .
 
---------------------------------------------निरंतर[कंटीन्यू}
 
 
 
,
 
 
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik crime thriller ( 230) Apradh !!

After Raghavendra and Sanjay Sharma’s friendship try decided to fix Sujay and Sushmita’s marriage. They later on conveyed this to their chil...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!