जब दिल गया तो जिस्म की हालत बिगड़ गई,
चहरे का रंग फक हुआ सूरत बिगड़ गई,
बेदिल में बेदिली नहीं कम मौत से कभी,
अब जिंदगी के सूरतो सीरत बिगड़ गई,
जिस दिल पे मुझे नाज़ था,वह दिल नहीं रहा,
ए हमनशीनो ! मजलिसे सोहबत बिगड़ गई!
हमने माना तगाफुल न करोगे लेकिन ,
खाक को जाएँगे हम ,तुमको खबर होने तक!
चहरे का रंग फक हुआ सूरत बिगड़ गई,
बेदिल में बेदिली नहीं कम मौत से कभी,
अब जिंदगी के सूरतो सीरत बिगड़ गई,
जिस दिल पे मुझे नाज़ था,वह दिल नहीं रहा,
ए हमनशीनो ! मजलिसे सोहबत बिगड़ गई!
हमने माना तगाफुल न करोगे लेकिन ,
खाक को जाएँगे हम ,तुमको खबर होने तक!
तुम मेरे पास होते हो गोया ,जब कोई दूसरा नहीं होता!
जो कुछ मांगना है खुदा से मांग ए अकबर ,
यही वह दर है के जिल्लत नहीं सवाल के बाद!
यही वह दर है के जिल्लत नहीं सवाल के बाद!
कुशादा दस्ते करम जब वो बेनियाज़ करे,
नियाज़ मंद न क्यूँ आजिजी पर नाज़ करे!
अर्थ—जब वह निस्पृह उपरवाला हाथ खोल कर दे तो वह भिखारी भी प्रार्थी होने में गर्व क्यों न करे!
नियाज़ मंद न क्यूँ आजिजी पर नाज़ करे!
अर्थ—जब वह निस्पृह उपरवाला हाथ खोल कर दे तो वह भिखारी भी प्रार्थी होने में गर्व क्यों न करे!
गुल ए बू कलियों में रहती थी मगर रह न सकी,
मैं तो काँटों में रहा और परेशां न हुआ !
मैं तो काँटों में रहा और परेशां न हुआ !
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