मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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बुधवार, 9 नवंबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !!{145}

दिल का हूज़रा साफ़ कर जाना के आने के लिए,
ध्यान गैरों का मिटा उसके बिठाने के लिए !
सर बढ़ाना नेस्तम दारम कुलाहे,चार तर्क,
तर्क दुनिया,तर्क उकबा तर्क मौला तर्क तर्क 
इश्क का हमारे यों ही इम्तहां हो जायेगा,
वे दहन माशूक खुद ही बेजुबां हो जायेगा!

न तड़पने की इजाजत है,न फ़रियाद की है,
घुट के मर जाऊं यह मर्ज़ी मेरे सय्याद  की है!
 कल का दिन किसने देखा है,
आज का दिन हम खोये क्यों?
जिन घड़ियों में हँस सकते हैं,
उन घड़ियों में रोयें क्यों?”साहिर”

असर इतना हो जाये मेरे मश्के तसव्वुर में,
तेरी  जब   देखू मेरी तस्वीर बन जाये!

खुदा को पाया तो क्या न पाया,
खुदा मिला तो सभी मिला हैं 
जरा तो सोचो मिला जो खालिक 
तो    उससे खलकत  कभी जुदा है !

खुलते नहीं मुकामे सियासत के पेंचों ख़म,
मकतल है मय कदा है चमन है की अंजुमन !

जब हुस्न को बहाद्दे नज़र देखता हूँ मैं,
मुश्किल है ताबे दीद मगर देखता हूँ मैं 
है मद्दे नज़र उनके मेरे दिल की हैसियत,
है अपनी नज़र अपना जमाल अपना आईना ,
क्या जुर्म कर रहा हूँ अगर देखता हूँ मैं?
शायद इसीका नाम है मेराजे आशिकी ,
वो सामने खड़े हैं जिधर देखता हूँ मैं 
शायद कभी उचटती मुझ पे भी पड़  जाए,
यूँ बार बार उनकी नज़र देखता हूँ मैं!

सर फरोशी की तमन्ना ,अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है!

जब तक मिले न थे ,जुदाई का था मलाल,
अब ये मलाल है के तमन्ना निकल गई!

तेरे करम से सलामत है मेरी जिंदगी,
तेरा करम नहीं तो क़यामत है जिंदगी !

मेरे नालों के असर से दिल तेरा हिल जायेगा 
मैं मरा तो गाज तेरा ख़ाक में मिल जाएगा !
दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन
 बैठे  रहे तसव्वुरे जाना  किये हुए !

नेरंगियों से यार की हैरान हो जियो
 हर रंग में उसी को नमूदार देखना !

कोई जां हो,हरम हो या सनम खाना हो,
 नक़्शे कदम यार पे सजदा करना है!

कैसे कह दूँ  के मुलाकात नहीं  होती है, 
मिलते रहते हैं मगर बात नहीं होती है!

तेरा ही नाम लेकर खिलते हैं गुल चमन में,
तारों में चाँद बनकर तू मुस्कुरा रहा है!
तौबा से कोई कहदे आये न मैकदे में ,
जादू  भरी  नज़र से साकी पिला रहा है!

जिन्हें है इश्क सादिक वह कहाँ फ़रियाद करते हैं,
लबों पे मुहर ख़ामोशी ,दिलों में याद करते हैं,
फिराके यार में दिन जिंदगी में अपनी भरते हैं,
सिसकते हैं पड़े आशिक न जीते हैं न मरते हैं!

न पा सकते जिसे पाबन्द रहकर कैदे  जाए हस्ती में,
सो हमने बेनिशां होकर तुझे जो बेनिशां पाया !

उन्ही की किरण से जीवन की राह पाई है,
वरना भटक चुके यां लाखों मशाल वाले!

हम रोने पे आये तो दरिया बहा दें ,
शबनम क तरह से हमें रोना नहीं आता “जौक “

हश्र के दिन वो गुनाहगार न बक्शा जाए ,
जिसने देखा तेरी आँखों का पशेमां होना!”जिगर मुरादाबादी 

तेरे ज़िक्र ने तेरे फ़िक्र ने तेरी याद ने वो मज़ा दिया ,
की जहाँ मिला कोई नक्शेपा वहीँ हमने सर को झुक दिया!”बहजाद”

बड़े शौको तवज्जो से सुना दिल की धड़कनों को,
मैं ये समझा शायद आपने आवाज़ दी होगी!”महिरुल”

न थी हाल की जब हमें अपनी खबर, 
रहे देखते औरों के ऐबे हुनर,
पड़ी अपनी बुराइयों पे जो नज़र,
तो निगाह में कोई बुरा न रहा!”ज़फर” 

जिंदगी का साज़ भी क्या साज़ है,
बज रहा है और बेआवाज़ है!

कही से ढूंढ़ के लादे हमें भी गुलेतर ,
वो जिंदगी जो गुजर जाए मुस्कुराने में!”आसी”

जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसे,
जिसको तुम याद हो वो और  याद करे!

शायद मुझे निकाल के पछता रहे हैं आप,
महफ़िल में इस ख़याल से फिर आ गया हूँ मैं!





  

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