अनाथ कौन है यहाँ त्रिलोकनाथ साथ है,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं!
अमीय हलाहल मद भरे ,श्वेत श्याम रतनार,
जियत मरत झुकी झुकी परत ,जेहि चितवत एक बार!
अर्थ—–नायिका के नयन अमृत ,विष,एवं शराब से भरे हैं,वह जिसे भी एक नज़र देख लेती है वह जीता है मरता है ,झुक झुक कर गिरता है।
शबे बरात है रोशन चराग गुल कर दो,
इस दुनिया में क्या काम है जलने वालों का !
निगाहे नाज़ पर लायसेंस क्यूँ नहीं,
ये भी तो क़त्ल करती है शमशीर की तरह!
कल तलक बिस्तर से भी न उठाने पाए थे,
और आज इस दुनिया से उठ गए!
न तुझसे न तेरी सूरत से गरज है,
हम तो मुसव्वर की कलम देखते हैं!
बताओ जियें भी तो किसके सहारे,
न दिल भी हमारा न तुम भी हमारे!
शमा ने जल के कहा कान में परवाने के,
रात भर मैं भी जली हूँ तेरे जल जाने से!
जिंदगी में जिंदगी की शर्त अगर पूरी न हो,
जिंदगी को जिंदगी से रूठ जाना चाहिए!
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