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शनिवार, 5 नवंबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !!{159}

यही है इबादत यही दीं इमां 
के दुनिया में काम आये इंसा के इंसा !

देखा जो आज तक था तस्वीर थी तेरी,
जो कुछ सुना था हमने वह था कलाम था तेरा!

गुलशन परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़,
काँटों से भी निबाह किये जा रहा हूँ मैं!

कभी सोचा है ए इंसान !तुझे दुनिया से जाना है,
किये हैं  कर्म जो तूने,सिला कुछ उनका पाना है,
अगर खुदा ने बखशा है,तुझे कुछ इज्ज़त व रुतबा,
अमानत जान उसमे कुछ इजाफा कर दिखाना है,
नुमाइश और दिखावा गरचे तेरे मन को भाता है,
लिफाफा कुछ नहीं चिट्ठी का मज़मून देखा जाता है!

कार साजे मां बफिक्रे मां ,
फ़िक्र मां दरकार कां आजार मां !

दिल को लगी जी ठेस तो फिर होश आ गया,
समझी फ़िज़ूल थीं हमने वो प्यार की अदाएं!

शक्ल तो देखो मुस्सव्वुर खींचेगा तस्वीर यार,
आप ही तस्वीर उसको देख कर हो जायेगा!

जन्दगी जिन्दादिली का नाम है 
मुर्दादिल क्या ख़ाक जिया करते हैं!

दिल के आईने में हैं तस्वीरे यार,
जब जरा गर्दन झुकाई देख ली!

इम्तहाये लागरी में जब नज़र आया न मैं,
हंस के वो कहने लगे बिस्तर को झाड़ा चाहिए!

आँखें न जीने देंगी तेरी बेवफा मुझे ,
इन खिडकियों से झाँक रही है कज़ा मुझे!

इश्क नाज़ुक मिजाज़ है बेहद,
अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता!


हम ऐसी कुल किताबों को काबिले जब्ती समझते हैं,
के जिनको पढके बेटे बाप को खब्ती समझते हैं!

शमा तू हट के जल मेरे मज़ार से,
मैं खुद ही जल रहा हूँ दिले बेकरार से!

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