दुनिया क्या है ?मनो दगाबाजों का एक हुजूम ,
या दौलत के [पीछे भागती दीवानावार भीड़ ,
बीच में है दौलत और इर्द गिर्द सारा जहाँ
सारे रिश्ते सारे दोस्त सारे नेता,
जितनी दौलत उतनी इज़्ज़त,उतना दबदबा ,
कहाँ से आयी परवाह नहीं
इसका कोई रंग नहीं ,
न काला न सफ़ेद
चर्चे हों बदनामी हो कोई फर्क नहीं
कौन करेगा इन्साफ?
क्योंकि इस हम्माम में सब बेनक़ाब हैं
कमोबेश सभी एक से हैं
गुनाह का एहसास ?
तौबा कीजिये जनाब
दिल हों ,जज़्बात हों ,तब तो एहसास हो
जहाँ : संसार,हुजूम : भीड़ ,हम्माम : वह जहाँ सामूहिक रूप से नहाने की व्यवस्था हो,जज़्बात : भाव ,इंसाफ: न्याय
या दौलत के [पीछे भागती दीवानावार भीड़ ,
बीच में है दौलत और इर्द गिर्द सारा जहाँ
सारे रिश्ते सारे दोस्त सारे नेता,
जितनी दौलत उतनी इज़्ज़त,उतना दबदबा ,
कहाँ से आयी परवाह नहीं
इसका कोई रंग नहीं ,
न काला न सफ़ेद
चर्चे हों बदनामी हो कोई फर्क नहीं
कौन करेगा इन्साफ?
क्योंकि इस हम्माम में सब बेनक़ाब हैं
कमोबेश सभी एक से हैं
गुनाह का एहसास ?
तौबा कीजिये जनाब
दिल हों ,जज़्बात हों ,तब तो एहसास हो
जहाँ : संसार,हुजूम : भीड़ ,हम्माम : वह जहाँ सामूहिक रूप से नहाने की व्यवस्था हो,जज़्बात : भाव ,इंसाफ: न्याय
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