मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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बुधवार, 16 मई 2018

Wajood Se : Duniya !!

दुनिया क्या है ?मनो दगाबाजों का एक हुजूम ,
या दौलत के [पीछे भागती दीवानावार भीड़ ,
बीच में है दौलत और इर्द गिर्द सारा जहाँ 
सारे रिश्ते सारे दोस्त सारे नेता,
जितनी दौलत उतनी इज़्ज़त,उतना दबदबा ,
कहाँ से आयी परवाह नहीं 
इसका कोई रंग नहीं ,
न काला न सफ़ेद 
चर्चे हों बदनामी हो कोई फर्क नहीं 
कौन करेगा इन्साफ?
क्योंकि इस हम्माम में सब बेनक़ाब हैं 
कमोबेश सभी एक से हैं 
गुनाह का एहसास ?
तौबा कीजिये  जनाब 
दिल हों ,जज़्बात हों ,तब तो एहसास हो 

जहाँ : संसार,हुजूम : भीड़ ,हम्माम : वह जहाँ सामूहिक रूप से नहाने की व्यवस्था हो,जज़्बात : भाव ,इंसाफ: न्याय 

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