जिस दम निकलता है दम,आती है मौत,
हो जाती है रूह फनाह ,
उसी डैम हो जाती है गम,एक शख्सियत ,
एक इंसान,उसका ओहदा,उसका रिश्ता,और उसका नाम ,
उसी डैम रह जाता है वह महज़ एक मुर्दा जिस्म ,
जिसे आनन् फानन लोग ,ज़मीन पर उतार देते हैं
और चाँद घंटों बाद ज़मीन के नीचे भी उतार देते हैं नामो निशाँ
रह जाती है एक तस्वीर ,जिसके आगे धुप जलाते हैं ,
अगरबत्तियां जलाते हैं ,उस पर फूलों के हार भी चढ़ाते हैं
चलता है यह सिलसिला चंद रोज़
फिर वह तस्वीर दीवार पर टंग जाती है ,धूल खाती है,
कभी कभी ही जाती है जिस पर नज़र ,
और आरसे बाद जब वह ज़िंदा लोगों की ज़िन्दगी से मेल नहीं खाती है
तो उतार कर रख दी जाती है
वहीँ पर टूटती फूटती है
और किसी दिन घर के कबाड़ में पड़ी नज़र आती है !
ओहदा :पद,शख्सियत:व्यक्तित्व ,रूह फनाह होना : आत्मा का शरीर से निकल जाना ,आनन् फानन :तुरत फुरत
हो जाती है रूह फनाह ,
उसी डैम हो जाती है गम,एक शख्सियत ,
एक इंसान,उसका ओहदा,उसका रिश्ता,और उसका नाम ,
उसी डैम रह जाता है वह महज़ एक मुर्दा जिस्म ,
जिसे आनन् फानन लोग ,ज़मीन पर उतार देते हैं
और चाँद घंटों बाद ज़मीन के नीचे भी उतार देते हैं नामो निशाँ
रह जाती है एक तस्वीर ,जिसके आगे धुप जलाते हैं ,
अगरबत्तियां जलाते हैं ,उस पर फूलों के हार भी चढ़ाते हैं
चलता है यह सिलसिला चंद रोज़
फिर वह तस्वीर दीवार पर टंग जाती है ,धूल खाती है,
कभी कभी ही जाती है जिस पर नज़र ,
और आरसे बाद जब वह ज़िंदा लोगों की ज़िन्दगी से मेल नहीं खाती है
तो उतार कर रख दी जाती है
वहीँ पर टूटती फूटती है
और किसी दिन घर के कबाड़ में पड़ी नज़र आती है !
ओहदा :पद,शख्सियत:व्यक्तित्व ,रूह फनाह होना : आत्मा का शरीर से निकल जाना ,आनन् फानन :तुरत फुरत
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