बयां नहीं हो सकता ,नाकामयाबी का दर्द ,
कसकता रहता है सीने में,हर वक़्त ,हरदम ,बेदर्द
गुमशुदा लफ़्ज़ों की ,करती हूँ तलाश
कोई तहरीर भी नहीं ,दे पाती मानी
हो गई हूँ हताश ,हर्फ़ लगते हैं बेजान,
लिखती रहती हूँ ,मिटाती रहती हूँ ,अपना ही लिखा
सोचती रहती हूँ
भला कौन मिटा सकता है
मुकद्दर का लिखा
जो लिखा है न जाने कौन सी सियाही से
दिखाई तो नहीं पड़ता
लेकिन इसका हर्फ़ बा हर्फ़ कितना है कड़ा !!
मुकद्दर:किस्मत,तहरीर:लिखा हुआ ,हर्फ़ बा हर्फ़ : हर अक्षर ,लफ्ज़:शब्द
कसकता रहता है सीने में,हर वक़्त ,हरदम ,बेदर्द
गुमशुदा लफ़्ज़ों की ,करती हूँ तलाश
कोई तहरीर भी नहीं ,दे पाती मानी
हो गई हूँ हताश ,हर्फ़ लगते हैं बेजान,
लिखती रहती हूँ ,मिटाती रहती हूँ ,अपना ही लिखा
सोचती रहती हूँ
भला कौन मिटा सकता है
मुकद्दर का लिखा
जो लिखा है न जाने कौन सी सियाही से
दिखाई तो नहीं पड़ता
लेकिन इसका हर्फ़ बा हर्फ़ कितना है कड़ा !!
मुकद्दर:किस्मत,तहरीर:लिखा हुआ ,हर्फ़ बा हर्फ़ : हर अक्षर ,लफ्ज़:शब्द
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