जीत --
कितना फर्क होता है
ख्वाबों में और उनकी ताबीर में,
पथरीले रास्तों सी भीड़ मुश्किलों की ,
और उनसे जूझते इंसान ,
झाग के बुलबुलों से उनके ख्वाब,
और हक़ीक़त के पत्थर ,
उसे दिखाई जाने वाली रंगीन तस्वीर ,
और उसके पीछे छुपे सच के बदरंग पहलू ,
हौंसलों की उखड़ती पस्त साँसें,
फिर जद -ओ -जहद करते इंसान ,
एक एक दिन गुज़ार लेने पर खुश होते इंसान ,
मानो कोई जंग जीत आये हों इंसान !!
ताबीर : सच होना,जद -ओ -जहद :जीवन संघर्ष ,पस्त साँसें --उखड़ती साँसें
कितना फर्क होता है
ख्वाबों में और उनकी ताबीर में,
पथरीले रास्तों सी भीड़ मुश्किलों की ,
और उनसे जूझते इंसान ,
झाग के बुलबुलों से उनके ख्वाब,
और हक़ीक़त के पत्थर ,
उसे दिखाई जाने वाली रंगीन तस्वीर ,
और उसके पीछे छुपे सच के बदरंग पहलू ,
हौंसलों की उखड़ती पस्त साँसें,
फिर जद -ओ -जहद करते इंसान ,
एक एक दिन गुज़ार लेने पर खुश होते इंसान ,
मानो कोई जंग जीत आये हों इंसान !!
ताबीर : सच होना,जद -ओ -जहद :जीवन संघर्ष ,पस्त साँसें --उखड़ती साँसें
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