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बुधवार, 16 मई 2018

Wajood Se : Khauf !!

खौफ 

ये पहले एक लफ्ज़ था,
जिसे पढ़ा या सुना करती थी मैं,
आज ये है एक तज़ुर्बा ,
क्योंकि आज मेरे पास हैं वक़्त का वह हिस्सा 
जो सुनने  में तो लगता है बहुत कम 
लेकिन होता है सदियों की तरह 
जिसके साये में गुज़ारे हैं मैंने 
वो लम्हे जो कभी नहीं भूलेंगे सामने खड़ी  थी मौत,
अपने ही घर में कैद बेबसी 
अपने सामने खुद को लुटते देखने की लाचारी 
और हर पल मौत का खटका 
चाहे जितने हों अलफ़ाज़ बेहतरीन 
चाहे जितना हो मज़मून खरा 
महसूस नहीं कर सकता कोई 
जो मैंने महसूस किया 
खौफ के उन लम्हों को मैंने 
मर मर के कैसे जिया !!

खौफ : आतंक,लफ्ज़:शब्द,तज़ुर्बा:अनुभव,लम्हे:क्षण,मज़मून:लिखित व्यख्या ,बेहतरीन : सर्वोत्तम 

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