ढूंढोगे कब तक सहारे सहारे ,
जियो शान से हों ख़िज़ां या बहारें
पाओगे मोती जो डुबकी लगाओगे
चाहे समंदर हों कितने भी गहरे
रहते हैं रीते ,रहते हैं बेनाम ,
चलते हैं जो बस किनारे किनारे
बड़े काम के हैं ,ये फलसफे ,
चाहे हमारे ,चाहे तुम्हारे ,
जो अपनाए इनको,
वो हैं समझ वाले ,
मुश्किलों की तोड़ें मज़बूत दीवारें ,
जियें ख़ुशी से ,अपना अपना जीवन संवारें !
फलसफे : दर्शन,ख़िज़ा : पतझड़
जियो शान से हों ख़िज़ां या बहारें
पाओगे मोती जो डुबकी लगाओगे
चाहे समंदर हों कितने भी गहरे
रहते हैं रीते ,रहते हैं बेनाम ,
चलते हैं जो बस किनारे किनारे
बड़े काम के हैं ,ये फलसफे ,
चाहे हमारे ,चाहे तुम्हारे ,
जो अपनाए इनको,
वो हैं समझ वाले ,
मुश्किलों की तोड़ें मज़बूत दीवारें ,
जियें ख़ुशी से ,अपना अपना जीवन संवारें !
फलसफे : दर्शन,ख़िज़ा : पतझड़
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