मुड़ कर नहीं देखता कोई,
आगे बढ़ जाने के बाद ,
अँधेरे डूब जाते हैं
रौशनी होने के बाद
मुफलिसी से मिलती निजात
दौलत आ जाने के बाद,
बेनक़ाब हो जाते हैं लोग
साजिश फाश होने के बाद
शर्मिंदा मगर नहीं होते,
इतनी बदनामी के बाद,
हर नई शुरुआत होती है
पुराणी बीतने के बाद ,
सहर आती है हमेशा
रात के ढलने के बाद
बुढ़ापा ठहर जाता है ,
जवानी तर्क होने के बाद ,
कुछ नही होता लेकिन,
मौत के आने के बाद !
आगे बढ़ जाने के बाद ,
अँधेरे डूब जाते हैं
रौशनी होने के बाद
मुफलिसी से मिलती निजात
दौलत आ जाने के बाद,
बेनक़ाब हो जाते हैं लोग
साजिश फाश होने के बाद
शर्मिंदा मगर नहीं होते,
इतनी बदनामी के बाद,
हर नई शुरुआत होती है
पुराणी बीतने के बाद ,
सहर आती है हमेशा
रात के ढलने के बाद
बुढ़ापा ठहर जाता है ,
जवानी तर्क होने के बाद ,
कुछ नही होता लेकिन,
मौत के आने के बाद !
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