मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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रविवार, 27 मई 2018

Wajood Se : Sahar !!

मुड़ कर नहीं देखता कोई,
आगे बढ़ जाने के बाद ,
अँधेरे डूब जाते हैं 
रौशनी होने के बाद 
मुफलिसी से मिलती निजात 
दौलत आ जाने के बाद,
बेनक़ाब हो जाते हैं लोग 
साजिश फाश होने के बाद 
शर्मिंदा मगर नहीं होते,
इतनी बदनामी के बाद,
हर नई  शुरुआत होती है 
पुराणी बीतने के बाद ,
सहर आती है हमेशा 
रात के ढलने के बाद 
बुढ़ापा ठहर जाता है ,
जवानी तर्क होने के बाद ,
कुछ नही होता लेकिन,
मौत के आने के बाद !


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