ग़मों की शुरुआत का वो दिन
आज तक न भूली मैं
वो आंसू जो बहते रहे सारी रात
भिगोते रहे तकिया
आज भी उनकी नमी से
रूह मेरी नम है
हर शख्स करते दिखा सौदा
हर एक था माहिर सौदागर
सबने खरीदी बेहतर ज़िन्दगी
सबने चुने बेहतर रास्ते
सब पहुंचे मनचाही मंज़िलों पर
मैं लौट आई खोटे सिक्के की मानिंद
अपने पास
क्योंकि मुझसे बेहतर मेरा सौदागर कौन हो सकता है ?
क्योंकि मैं ही जानती हूं
मेरी कीमत क्या है !!
नमी :गीलापन ,माहिर : कुशल,मानिंद : तरह
आज तक न भूली मैं
वो आंसू जो बहते रहे सारी रात
भिगोते रहे तकिया
आज भी उनकी नमी से
रूह मेरी नम है
हर शख्स करते दिखा सौदा
हर एक था माहिर सौदागर
सबने खरीदी बेहतर ज़िन्दगी
सबने चुने बेहतर रास्ते
सब पहुंचे मनचाही मंज़िलों पर
मैं लौट आई खोटे सिक्के की मानिंद
अपने पास
क्योंकि मुझसे बेहतर मेरा सौदागर कौन हो सकता है ?
क्योंकि मैं ही जानती हूं
मेरी कीमत क्या है !!
नमी :गीलापन ,माहिर : कुशल,मानिंद : तरह
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