ए ज़िन्दगी तेरा एहतराम ,
न माँगा कुछ न मांगूंगी कभी कुछ तुझसे ,
तेरी तल्खियों को भी सीने से लगाया मैंने
काँटों पर चलते चलते अब तो दर्दे एहसास भी हो चला है गुम
अब तो शायद तू भी सोचती होगी,ढाऊ कौनसा सितम
मुझे तो आदत सी पड़ गई है मुश्किलों की
गर राह हो जाती आसां ,और हो जाती है चाहत हांसिल ,
तो रह जाती हूँ हैरां ,
सोचती हूँ ,कहीं ना हो यह ख्वाब ,
काम आ गया न जाने कौनसा सवाब !!
एहतराम:आदरयुक्त शुक्रिया ,तल्खियां : कड़वाहटें ,सितम : कष्ट ,हैरां :आश्चर्यचकित ,आसां :आसान ,
हांसिल :प्राप्ति ,दर्दे एहसास : कष्ट की अनुभूति ,ख्वाब: स्वप्न ,सवाब: पुण्य कार्य
न माँगा कुछ न मांगूंगी कभी कुछ तुझसे ,
तेरी तल्खियों को भी सीने से लगाया मैंने
काँटों पर चलते चलते अब तो दर्दे एहसास भी हो चला है गुम
अब तो शायद तू भी सोचती होगी,ढाऊ कौनसा सितम
मुझे तो आदत सी पड़ गई है मुश्किलों की
गर राह हो जाती आसां ,और हो जाती है चाहत हांसिल ,
तो रह जाती हूँ हैरां ,
सोचती हूँ ,कहीं ना हो यह ख्वाब ,
काम आ गया न जाने कौनसा सवाब !!
एहतराम:आदरयुक्त शुक्रिया ,तल्खियां : कड़वाहटें ,सितम : कष्ट ,हैरां :आश्चर्यचकित ,आसां :आसान ,
हांसिल :प्राप्ति ,दर्दे एहसास : कष्ट की अनुभूति ,ख्वाब: स्वप्न ,सवाब: पुण्य कार्य
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