मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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रविवार, 27 मई 2018

Wajood Se : Saza !!{156}

उम्रकैद सी कटी ज़िन्दगी ,
रिवायतों की सलाखों के पीछे ,
सुबकती सिसकती रही ज़िन्दगी 
रिवाज़ों के डंडे ,उसूलों की लाठियां 
खाती रही चींखती चिल्लाती रही ज़िन्दगी ,
ज़ख्म गहराते गए दिल पर ,
मरहम लगाती रही ज़िंदगीं ,
अब तो ढूँढना भी मुश्किल हो गया इसको ,
इतने ज़ख्मों के बीच न जाने कहाँ ,
खो गई ज़िन्दगी ,
हर शख्स बन गया मेरा जेलर ,
छीनता रहा मेरी आज़ाद ज़िन्दगी 
तोड़ता रहा मुझ पर ज़ुल्मो सितम 
बना दी मेरी जहन्नुम ज़िन्दगी ,
कहर बरपा होते रहे ,
क्यूं खामोश रही तू ! ए मेरी ज़िन्दगी !

रिवायत :परम्परा ,उसूल : मूल्य 

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