उम्रकैद सी कटी ज़िन्दगी ,
रिवायतों की सलाखों के पीछे ,
सुबकती सिसकती रही ज़िन्दगी
रिवाज़ों के डंडे ,उसूलों की लाठियां
खाती रही चींखती चिल्लाती रही ज़िन्दगी ,
ज़ख्म गहराते गए दिल पर ,
मरहम लगाती रही ज़िंदगीं ,
अब तो ढूँढना भी मुश्किल हो गया इसको ,
इतने ज़ख्मों के बीच न जाने कहाँ ,
खो गई ज़िन्दगी ,
हर शख्स बन गया मेरा जेलर ,
छीनता रहा मेरी आज़ाद ज़िन्दगी
तोड़ता रहा मुझ पर ज़ुल्मो सितम
बना दी मेरी जहन्नुम ज़िन्दगी ,
कहर बरपा होते रहे ,
क्यूं खामोश रही तू ! ए मेरी ज़िन्दगी !
रिवायत :परम्परा ,उसूल : मूल्य
रिवायतों की सलाखों के पीछे ,
सुबकती सिसकती रही ज़िन्दगी
रिवाज़ों के डंडे ,उसूलों की लाठियां
खाती रही चींखती चिल्लाती रही ज़िन्दगी ,
ज़ख्म गहराते गए दिल पर ,
मरहम लगाती रही ज़िंदगीं ,
अब तो ढूँढना भी मुश्किल हो गया इसको ,
इतने ज़ख्मों के बीच न जाने कहाँ ,
खो गई ज़िन्दगी ,
हर शख्स बन गया मेरा जेलर ,
छीनता रहा मेरी आज़ाद ज़िन्दगी
तोड़ता रहा मुझ पर ज़ुल्मो सितम
बना दी मेरी जहन्नुम ज़िन्दगी ,
कहर बरपा होते रहे ,
क्यूं खामोश रही तू ! ए मेरी ज़िन्दगी !
रिवायत :परम्परा ,उसूल : मूल्य
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