गीता सार --
प्रति दिन सिर्फ दस मिनिट ,
भगवान के सामने बैठ कर यह सोचना
कि ,यह घर मेरा नहीं है,
इसमें रहने वाले सदस्य मेरे कोई नहीं हैं
अलमारी में रखे अच्छे लगने वाले कपडे गहने मेरे नहीं हैं
बैंक में जमा रूपया ,FD'S , अथवा किसी भी रूप
में रखी सम्पत्ति अथवा धनराशि मेरी नहीं है ,
अति प्रिय पति अथवा पत्नी ,
भाई बहन अथवा बच्चे ,
"मैं अकेला हूँ अथवा अकेली हूँ ,
मेरे आँख मूंदते ही पटाक्षेप हो जाएगा ,
मेरी भूमिका बस आँख मूंदने तक है ,
मरणोपरांत क्या ? कहाँ ? कैसे ?
कोई नहीं जानता उस सूत्रधार को
लेकिन बखूबी संपन्न कर रहा है वह कार्यभार अपना
कोई छुपता नहीं उसकी दृष्टि की ओट ,
नन्ही सी चींटी हो या बड़ा सा हाथी
हमारे पाप हों बड़े बड़े या छोटा सा पुण्य हो कोई
उसके खाते में सबकुछ लिपिबद्ध हो रहा है क्षण प्रति क्षण ,
और हम में से हर एक के खाते में कितनी रकम जमा है ,
सत्कर्मों की ,अथवा खाली है वह ,
किसी का हक़ मारने से ,किसी को कठोर शब्दों से बेधा है ,
किसी के सम्मान को ठेस ,अथवा कोई जघन्य अपराध ,
खाते को घटाता बढ़ाता रहता होगा शायद !!
प्रति दिन सिर्फ दस मिनिट ,
भगवान के सामने बैठ कर यह सोचना
कि ,यह घर मेरा नहीं है,
इसमें रहने वाले सदस्य मेरे कोई नहीं हैं
अलमारी में रखे अच्छे लगने वाले कपडे गहने मेरे नहीं हैं
बैंक में जमा रूपया ,FD'S , अथवा किसी भी रूप
में रखी सम्पत्ति अथवा धनराशि मेरी नहीं है ,
अति प्रिय पति अथवा पत्नी ,
भाई बहन अथवा बच्चे ,
"मैं अकेला हूँ अथवा अकेली हूँ ,
मेरे आँख मूंदते ही पटाक्षेप हो जाएगा ,
मेरी भूमिका बस आँख मूंदने तक है ,
मरणोपरांत क्या ? कहाँ ? कैसे ?
कोई नहीं जानता उस सूत्रधार को
लेकिन बखूबी संपन्न कर रहा है वह कार्यभार अपना
कोई छुपता नहीं उसकी दृष्टि की ओट ,
नन्ही सी चींटी हो या बड़ा सा हाथी
हमारे पाप हों बड़े बड़े या छोटा सा पुण्य हो कोई
उसके खाते में सबकुछ लिपिबद्ध हो रहा है क्षण प्रति क्षण ,
और हम में से हर एक के खाते में कितनी रकम जमा है ,
सत्कर्मों की ,अथवा खाली है वह ,
किसी का हक़ मारने से ,किसी को कठोर शब्दों से बेधा है ,
किसी के सम्मान को ठेस ,अथवा कोई जघन्य अपराध ,
खाते को घटाता बढ़ाता रहता होगा शायद !!
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