ये छुट्टियों के दो महीने बहुत धीमे धीमे रेंगते हुए से गुज़र रहे थे। गर्मियां भी चटख थीं, अंजुरी ने जाते जाते अपनी पसंद की दो पुस्तकें रख लीं थीं ,जिन्हे वह धीरे धीरे राशनिंग से पढ़ रही थी ,ताकि उसकी पूरी छुट्टियां आराम से गुज़र जाएँ। इन दो महीनो में उसने चार चिट्ठियाँ प्रभा को लिखीं ,जबकि प्रभा की मात्र दो ही चिट्ठियां आईं।उन दिनों बोर्ड और युनिवर्सिटी की परीक्षाओं के नतीजे अखबार में प्रकाशित होते थे ,यह बात संतोषजनक थी कि नानी के घर मान्यता प्राप्त अखबार आता था ,और उस दिन अंजुरी की परीक्षा का नतीजा भी आ गया ,वह सभी के रोल नंबर्स की लिस्ट रख लाई थी और सभी पास हो गए थे ,प्रथम श्रेणी में उसका और कमल दोनों ही का नंबर था। उसने तुरंत ही प्रभा को पत्र लिखा सभी को बधाई दी,अपने वहां पहुँचने की तारिख भी लिखी ,कमलेश्वर को भी प्रथम श्रेणी के लिए ,प्रभा ने छोटा सा पत्र लिखा था उसे बधाई देते हुए ,इस तरह कमलेश्वर के बारे में अंजुरी को और अंजुरी के बारे में कमलेश्वर को इसी तरह चुटकी चुटकी जानकारी मिली ,और जैसे तैसे करके छुट्टियां समाप्त हुईं।पापा दो दिन की छुट्टी लेकर अंजुरी और उसकी मम्मी को लेने नानी के गांव पहुँच गए उन्होंने अंजुरी को प्रथम श्रेणी में पास होने की बधाई दी ,उन्होंने सहसा ही पूछा दूसरा कौन है ? अंजुरी ने बताया "वही जो सम्राट अशोक बना था ""अच्छा अच्छा वो बूढा खांसता हुआ --पापा हो हो हो कर के हंसने लगे ,और फिर सही दिन सही समय वे ट्रैन में बैठे ,नानी ने घर से ही बिदा कर दिया था। जब वे बस से घर पहुंचे सुबह के दस बज रहे थे। अंजुरी में जाने कहाँ से फुर्ती आ गई। उसने सारा सामान खोल कर ,कपडे धोने में डाले।अपने कमरे को व्यवस्थित किया ,अपनी किताबों को एक ओर रखा। अब उसे नयी किताबें लेनी होंगी। उसने पता करवाया कि महाविद्यालय कल से आरम्भ होने वाला है। सारा काम समाप्त कर वह वह बाहर बरामदे में खड़ी थी कि अचानक उसकी नज़र सामने रोड पर चली गई उस पर कमलेश्वर साइकिल चलता हुआ जा रहा था ,वह उसीकी ओर देख रहा था,शायद उसे प्रभा के माध्यम से पता चल गया था। वह मुस्कुराई ,और उसे साइकिल घुमाकर वापस जाते देखती रही।
दूसरा दिन नई ऊर्जा के साथ निकला। खुश ,उत्साह वर्धक ,अंजुरी ने अपनी नई ड्रेस पहनी थी उसे पापा ने गिफ्ट की थी ,नानी ने भी कई ड्रेसेस उसे गिफ्ट कीं थीं ,जो उन्होंने पहले ही से शहर से मंगवाकर रखीं थीं। उसने आईने में देखा उसे सामने एक नै अंजुरी दिख रही थी। नाश्ते की टेबल पर उसने पापा से पैसे लिए और बताया कि आज वो किताबों की लिस्ट ले आएगी,जिन्हे शहर से मंगवाना होगा।
दूसरा दिन नई ऊर्जा के साथ निकला। खुश ,उत्साह वर्धक ,अंजुरी ने अपनी नई ड्रेस पहनी थी उसे पापा ने गिफ्ट की थी ,नानी ने भी कई ड्रेसेस उसे गिफ्ट कीं थीं ,जो उन्होंने पहले ही से शहर से मंगवाकर रखीं थीं। उसने आईने में देखा उसे सामने एक नै अंजुरी दिख रही थी। नाश्ते की टेबल पर उसने पापा से पैसे लिए और बताया कि आज वो किताबों की लिस्ट ले आएगी,जिन्हे शहर से मंगवाना होगा।
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