वह व्यक्ति रणवीरसिंह भी निकल गया और कमलेश्वर और अंजुरी दोनों भी वापस हॉस्टल की ओर चल पड़े ,दोनों ही उदास थे। दोनों की खुशियों पर पाला पड़ गया था। हॉस्टल पहुँचने के तुरंत बाद ही आशा शर्मा मैडम भी पहुँच गईं थीं। अब दूसरे दिन दोनों के एक एक सिंगल्स और एक डबल्स मैच थे और ये तीनो ही मैच उस तहसील की टीम के साथ थे जो लगातार पांच वर्षों से चैम्पियन थे और इस बात की कटाई उम्मीद नहीं थी कि उन्हें हराया जा सके। और यह हो भी सकता था यदि दोनों का मन प्रफुल्लित होता ,उत्साहित होता ,लेकिन ऐसा नहीं था ,और दूसरे दिन वही हुआ जैसा अपेक्षित था ,तीनो ही मैच हाथ से निकल गए थे ,हालाँकि कमलेश्वर और अंजुरी ने अच्छी टक्कर दी थी। चौहान सर और आशा शर्मा मैडम ने दोनों को ढाँढस बंधाया और प्रोत्साहित करते हुए कहा था कि ,इस साल अच्छी प्रैक्टिस करते रहना और अगली बार चैम्पियन बन जाना।
अभी उन्हें यह रात और बितानी थी। कल सुबह दस बजे ही पुरस्कार वितरण था और उसे अटेंड कर के ही वे वापस जाने वाले थे। यह रात भी बेचैनी से ही गुज़री। दूसरे दिन सही समय पर कलेक्टर महोदय के द्वारा पुरस्कार वितरण हुआ। रनर्स अप वे दोनों ही थे ,उन्हें विशेष पुरस्कार भी दिए गए थे। चौहान सर और आशा शर्मा मैडम खुश थे ,उन्होंने कहा ,"अगली बार चैम्पियन बनना ,रोज प्रैक्टिस करना ,सिर्फ पंद्रह दिनों में तुम दोनों ने बाकी सभी टीमों को हरा दिया है तो साल भर प्रैक्टिस करके तुम निश्चित ही चैम्पियन बन सकते हो।
फंक्शन से लौटते हुए उन्होंने ढाबे पर खाना खाया और फिर हॉस्टल आकर अपना सामान पैक करने लगे ,चौहान सर ने कार्यालय जाकर सारी कागज़ी कार्यवाही पूरी करने गए ,उन्होंने वहीँ से तहसील में फ़ोन भी किया ताकि बस पहुँचने पर जीप अंजुरी को घर ले जा सके, फिर तांगे में बैठ कर बस स्टॉप की ओर चल पड़े।
बस में अपने आप ही मैडम और सर आगे वाली सीट पर बैठ गए तो अंजुरी और कमलेश्वर भी पिछली सीट पर बैठ गए। बस चल पड़ी तो कमल ने धीरे धीरे बोलना शुरू किया इस प्रकार कि उसकी अंजू ही सुन सके ,उसने कहा कि " रणवीर सिंह चाचा ज़रूर ही जाकर पापा को बताएँगे और हम दोनों को अब बहुत सम्हल कर ही रहना होगा। उसने कहा हम एक दूसरे को पत्र लिखेंगे और नोटबुक में रख कर दिया करेंगे वो भी किसी को पता चले बगैर।
अंजुरी बुत बनी उसे देखती रह गई ,वह सोच रही थी कि " क्या कमल ज़रुरत से ज्यादा डरता है ?
बस पहुँच गई थी ,अंजुरी को लेने जीप आयी हुई थी ,बाकी तीनो को एक ही दिशा में जाना था।
अभी उन्हें यह रात और बितानी थी। कल सुबह दस बजे ही पुरस्कार वितरण था और उसे अटेंड कर के ही वे वापस जाने वाले थे। यह रात भी बेचैनी से ही गुज़री। दूसरे दिन सही समय पर कलेक्टर महोदय के द्वारा पुरस्कार वितरण हुआ। रनर्स अप वे दोनों ही थे ,उन्हें विशेष पुरस्कार भी दिए गए थे। चौहान सर और आशा शर्मा मैडम खुश थे ,उन्होंने कहा ,"अगली बार चैम्पियन बनना ,रोज प्रैक्टिस करना ,सिर्फ पंद्रह दिनों में तुम दोनों ने बाकी सभी टीमों को हरा दिया है तो साल भर प्रैक्टिस करके तुम निश्चित ही चैम्पियन बन सकते हो।
फंक्शन से लौटते हुए उन्होंने ढाबे पर खाना खाया और फिर हॉस्टल आकर अपना सामान पैक करने लगे ,चौहान सर ने कार्यालय जाकर सारी कागज़ी कार्यवाही पूरी करने गए ,उन्होंने वहीँ से तहसील में फ़ोन भी किया ताकि बस पहुँचने पर जीप अंजुरी को घर ले जा सके, फिर तांगे में बैठ कर बस स्टॉप की ओर चल पड़े।
बस में अपने आप ही मैडम और सर आगे वाली सीट पर बैठ गए तो अंजुरी और कमलेश्वर भी पिछली सीट पर बैठ गए। बस चल पड़ी तो कमल ने धीरे धीरे बोलना शुरू किया इस प्रकार कि उसकी अंजू ही सुन सके ,उसने कहा कि " रणवीर सिंह चाचा ज़रूर ही जाकर पापा को बताएँगे और हम दोनों को अब बहुत सम्हल कर ही रहना होगा। उसने कहा हम एक दूसरे को पत्र लिखेंगे और नोटबुक में रख कर दिया करेंगे वो भी किसी को पता चले बगैर।
अंजुरी बुत बनी उसे देखती रह गई ,वह सोच रही थी कि " क्या कमल ज़रुरत से ज्यादा डरता है ?
बस पहुँच गई थी ,अंजुरी को लेने जीप आयी हुई थी ,बाकी तीनो को एक ही दिशा में जाना था।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें