आग़ाज -------
ता उम्र अपने सफीने को ,
तूफां से घिरा पाया मैंने ,
रही हर वक़्त बचाने में लगी ,
जब से होश सम्हाला मैंने
बदहवास ही रही हरदम,
होशो हवास सम्हालती ,
जब आया होश तो,
खुद को आबाद पाया मैंने ,
शुक्र खुदा का ,उसकी खुदाई का,
उसकी रहमत का रहनुमाई का,
वही तो है जिसने,
कदम दर कदम सम्हाला है मुझे,
दामन को अपने आज,
फूलों से भरा पाया मैंने,
जब सोचा,
चलो जिंदगी की शाम हुई ,
तब एक नए आगाज का पैगाम आया,
मैं खुश हूँ पर कुछ परीशां भी हूँ,
बार बार दिल को समझाया मैंने
न गिरुं,न डगमगाऊ
सम्हल सम्हल कर यह पहला
कदम उठाया मैंने।
कठिन शब्द----- आगाज -आरम्भ,सफीना-जहाज ,रहनुमाई-मार्ग दिखाना
ता उम्र अपने सफीने को ,
तूफां से घिरा पाया मैंने ,
रही हर वक़्त बचाने में लगी ,
जब से होश सम्हाला मैंने
बदहवास ही रही हरदम,
होशो हवास सम्हालती ,
जब आया होश तो,
खुद को आबाद पाया मैंने ,
शुक्र खुदा का ,उसकी खुदाई का,
उसकी रहमत का रहनुमाई का,
वही तो है जिसने,
कदम दर कदम सम्हाला है मुझे,
दामन को अपने आज,
फूलों से भरा पाया मैंने,
जब सोचा,
चलो जिंदगी की शाम हुई ,
तब एक नए आगाज का पैगाम आया,
मैं खुश हूँ पर कुछ परीशां भी हूँ,
बार बार दिल को समझाया मैंने
न गिरुं,न डगमगाऊ
सम्हल सम्हल कर यह पहला
कदम उठाया मैंने।
कठिन शब्द----- आगाज -आरम्भ,सफीना-जहाज ,रहनुमाई-मार्ग दिखाना
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