हलाहल--------
शिक्षित योग्य और मेधावी,
सत्यनिष्ठ और ईमानदार
कुंठित अपराधी बनते हैं,
अब रहते हैं बेरोजगार।
समाप्तप्राय हो चुका है समझो ,
अब कविताओं का प्रचलन,
कहाँ है चिंतन,कहाँ मनन,
प्रबुद्ध वर्ग का पाठन पठन।
अलंकारिक से शब्दों का,
चुन चुन कर किया गया संयोजन,
कागज पर स्याही भरी,
रुक रुक कर चलती कलम।
शिक्षित योग्य और मेधावी,
सत्यनिष्ठ और ईमानदार
कुंठित अपराधी बनते हैं,
अब रहते हैं बेरोजगार।
समाप्तप्राय हो चुका है समझो ,
अब कविताओं का प्रचलन,
कहाँ है चिंतन,कहाँ मनन,
प्रबुद्ध वर्ग का पाठन पठन।
अलंकारिक से शब्दों का,
चुन चुन कर किया गया संयोजन,
कागज पर स्याही भरी,
रुक रुक कर चलती कलम।
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