हलाहल------
जो अच्छा है जो सच्चा है,
विडम्बना है उसका जीवन,
शुष्क अधर और झोली खाली ,
देन्य टपकता उनके आनन्।
चमक दमक की चकाचौंध से ,
विचलित होता रहता है मन,
नित्य नया संघर्ष जन्मता
अच्छाई और बुराई में।
ललचाई नज़रों से देखे,
मैक डोनाल्ड को इनके बच्चे,
शुष्क अधर पर जीभ फेरते,
तृषित ह्रदय ये सीधे सच्चे।
बुद्धिमान हैं इसीलिए तो,
भरा कल्पनाओं का आँगन,
ए सी कार टी वी बंगला,
नाच रहे नैनो के प्रांगण।
जो अच्छा है जो सच्चा है,
विडम्बना है उसका जीवन,
शुष्क अधर और झोली खाली ,
देन्य टपकता उनके आनन्।
चमक दमक की चकाचौंध से ,
विचलित होता रहता है मन,
नित्य नया संघर्ष जन्मता
अच्छाई और बुराई में।
ललचाई नज़रों से देखे,
मैक डोनाल्ड को इनके बच्चे,
शुष्क अधर पर जीभ फेरते,
तृषित ह्रदय ये सीधे सच्चे।
बुद्धिमान हैं इसीलिए तो,
भरा कल्पनाओं का आँगन,
ए सी कार टी वी बंगला,
नाच रहे नैनो के प्रांगण।
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