हलाहल------मध्यम वर्ग
मध्यम वर्ग है लालायित सा,
मन में लिए हुए मलाल,
देख रहा वह उच्च वर्ग को,
और उसके ऐश्वर्य विशाल,
शिक्षा भी है और संस्कार,
होते हैंये समझदार,
संस्कृति की ये रक्षा करते,
ये सभ्यता के पहरेदार।
अच्छाई का मिला इन्हें ही,
गौरव पूर्ण उत्तराधिकार,
देशभक्त ये ,देशप्रेमी ये,
कई बने इक यादगार।
जीवन एक संघर्ष अनवरत,
शुरू होता है जन्म से,
चलता रहता है आजीवन,
और मृत्यु पर होता अंत।
प्रति दिन प्रतिपल नया प्रश्नचिन्ह
या होता प्रश्नों का जंगल
सुलझाने में जिसे
बुद्धि मन में होते रहते हैं दंगल।
कभी हारता कभी जीतता,
कभी डाल देता हथियार ,
कपटी की होती जयकार,
क्योंकि है उसका संसार।
मध्यम वर्ग है लालायित सा,
मन में लिए हुए मलाल,
देख रहा वह उच्च वर्ग को,
और उसके ऐश्वर्य विशाल,
शिक्षा भी है और संस्कार,
होते हैंये समझदार,
संस्कृति की ये रक्षा करते,
ये सभ्यता के पहरेदार।
अच्छाई का मिला इन्हें ही,
गौरव पूर्ण उत्तराधिकार,
देशभक्त ये ,देशप्रेमी ये,
कई बने इक यादगार।
जीवन एक संघर्ष अनवरत,
शुरू होता है जन्म से,
चलता रहता है आजीवन,
और मृत्यु पर होता अंत।
प्रति दिन प्रतिपल नया प्रश्नचिन्ह
या होता प्रश्नों का जंगल
सुलझाने में जिसे
बुद्धि मन में होते रहते हैं दंगल।
कभी हारता कभी जीतता,
कभी डाल देता हथियार ,
कपटी की होती जयकार,
क्योंकि है उसका संसार।
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