ये भारत के भाग्य विधाता,
नहीं जानते अपना मोल,
ना समझी में कर जाते ये,
व्यर्थ निरर्थक मत अनमोल।
इतनी लम्बी आजादी पर,
ख़ाक छानते ये दरबदर,
भोजन वस्त्र मकान भी इनको,
नहीं हुआ अब तलक मयस्सर।
कोई नहीं इनका हमदर्द,
कोई नहीं करता प्रयास ,
स्वच्छ स्वस्थ इनके जीवन का,
तनिक न नेता को आभास।
फिर भी ये सब हैं अनमोल,
क्योंकि सभी के मत अनमोल,
पांच वर्ष में नेताजी भी,
उपहार बाँटते हैं दिल खोल।
हाय रे कैसी विडम्बना ,
कैसी भोग रहे यंत्रणा ,
ड्राइंग रूम में बैठे मंत्री,
इन वोटों पर करें मंत्रणा।
बुद्ध यदि फिर जीवित होते,
पुनर्जीवन पाते महावीर,
देख के इस परिद्रश्य को दोनों,
तत्क्षण तज देते शरीर।-------निरंतर [कंटीन्यू ]
नहीं जानते अपना मोल,
ना समझी में कर जाते ये,
व्यर्थ निरर्थक मत अनमोल।
इतनी लम्बी आजादी पर,
ख़ाक छानते ये दरबदर,
भोजन वस्त्र मकान भी इनको,
नहीं हुआ अब तलक मयस्सर।
कोई नहीं इनका हमदर्द,
कोई नहीं करता प्रयास ,
स्वच्छ स्वस्थ इनके जीवन का,
तनिक न नेता को आभास।
फिर भी ये सब हैं अनमोल,
क्योंकि सभी के मत अनमोल,
पांच वर्ष में नेताजी भी,
उपहार बाँटते हैं दिल खोल।
हाय रे कैसी विडम्बना ,
कैसी भोग रहे यंत्रणा ,
ड्राइंग रूम में बैठे मंत्री,
इन वोटों पर करें मंत्रणा।
बुद्ध यदि फिर जीवित होते,
पुनर्जीवन पाते महावीर,
देख के इस परिद्रश्य को दोनों,
तत्क्षण तज देते शरीर।-------निरंतर [कंटीन्यू ]
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