हलाहल----
घरवाली की धोती पर भी,
कथरी और कमीज में पैबंद,
पैबन्दों से भरा है जीवन ,
जीवन इनका है पैबंद।
जहरीला सरसों का तेल,
या डेंगू का हो प्रकोप,
बाढ़ भूकंप की आपदा का,
इन पर टूटे पहला कोप।
तपती हुयी गर्मियां हों या ,
कड़कती सी सर्दियाँ,
आग लगे तो सबसे पहले ,
जल जाती हैं झुग्गियां।
अशिक्षा का अन्धकार,
और अज्ञान का ये भण्डार,
इनके पास नहीं संस्कार,
जीवन बनता एक विकार।
खुश हो जाना मदिरा पीकर ,
अहम तुष्टि है मार पीट कर ,
इसीलिए अपराध जन्मता,
बहुतायत में इनके अन्दर।
जब जनम लेता है मानव ,
तब वह होता है निष्पाप,
घोर गरीबी मुख्य रूप से ,
उससे करवाती अपराध।
कर्जा लेकर करते शादी ,
कर्जे से मानते त्यौहार,
कर्जा लेकर मृत्युभोज भी,
कर्ज चुकाना है दुश्वार।------------निरंतर[कंटीन्यू ]
घरवाली की धोती पर भी,
कथरी और कमीज में पैबंद,
पैबन्दों से भरा है जीवन ,
जीवन इनका है पैबंद।
जहरीला सरसों का तेल,
या डेंगू का हो प्रकोप,
बाढ़ भूकंप की आपदा का,
इन पर टूटे पहला कोप।
तपती हुयी गर्मियां हों या ,
कड़कती सी सर्दियाँ,
आग लगे तो सबसे पहले ,
जल जाती हैं झुग्गियां।
अशिक्षा का अन्धकार,
और अज्ञान का ये भण्डार,
इनके पास नहीं संस्कार,
जीवन बनता एक विकार।
खुश हो जाना मदिरा पीकर ,
अहम तुष्टि है मार पीट कर ,
इसीलिए अपराध जन्मता,
बहुतायत में इनके अन्दर।
जब जनम लेता है मानव ,
तब वह होता है निष्पाप,
घोर गरीबी मुख्य रूप से ,
उससे करवाती अपराध।
कर्जा लेकर करते शादी ,
कर्जे से मानते त्यौहार,
कर्जा लेकर मृत्युभोज भी,
कर्ज चुकाना है दुश्वार।------------निरंतर[कंटीन्यू ]
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