फ़र्ज़ -----
कर लो पूरे सारे फ़र्ज़,
न जाने मौत की कौन सी घडी मुक़र्रर हो,
चुका दो यहीं पर सारे क़र्ज़,
न जाने आँखें बंद हो जाएं,
जी लो जीभर कर जिंदगी,
न जाने कब जिंदगी दगा दे जाए
बदी से तौबा ,नेकी से दोस्ती कर लो,
न जाने कब हिसाब देना पद जाए ,
कुछ तो कर लो ऐसा,
अपनो के दिलों में मीठी याद बन जाये,
जिस्म से भले ही जान निकले,
तुम्हारा नाम रह जाए !
फकीरी------
तमाम उम्र काट दी फक्कड़ों की तरह,
जिंदगी भी जी ली फकीरों की तरह,
मीलों की दूरी नाप दी,दो वक़्त की रोटी के लिये ,
बड़ी मशक्कत की,हर एक दिन गुजारने के लिये ,
हर सवाल सुलझाने के लिये,
हर मुसीबत से छुटकारा पाने के लिये ,
कभी मयस्सर न हुआ चैन,न सुकून से कटे दिन,
बार बार तबाह किया,आँधियों ने नशेमन,
बार बार तिनके चुन बनती रही,
वक़्त के बहाव में बहती रही,
गिरती रही सम्हलती रही,
फिर भी सारी मुश्किलों में ,मुस्कुराती रही,जीती रही,
जिन्दादिली के साथ,
खुद का शुक्र अदा करती रही,
की उसने नवाज़ा है मुझे ,
अपने खजाने के ,एक नायाब नगीने से,
मेरा वारिस,जिसने कोई शिकायत किये बगैर,
मुफलिसी में भी अहम मकाम पाया है,
एहसास है जिसे मेरे दर्द ओ मुसीबत का,
और बन गया है जो,मेरा रहनुमा,मेरा मुहाफ़िज़!
शब्द अर्थ---मशक्कत--कड़ी मेहनत ,मुफलिसी--गरीबी,नवाज़ा--दिया,रहनुमा--देखभाल करनेवाला,
मुहाफ़िज़--रक्षक,नशेमन--घोंसला
कर लो पूरे सारे फ़र्ज़,
न जाने मौत की कौन सी घडी मुक़र्रर हो,
चुका दो यहीं पर सारे क़र्ज़,
न जाने आँखें बंद हो जाएं,
जी लो जीभर कर जिंदगी,
न जाने कब जिंदगी दगा दे जाए
बदी से तौबा ,नेकी से दोस्ती कर लो,
न जाने कब हिसाब देना पद जाए ,
कुछ तो कर लो ऐसा,
अपनो के दिलों में मीठी याद बन जाये,
जिस्म से भले ही जान निकले,
तुम्हारा नाम रह जाए !
फकीरी------
तमाम उम्र काट दी फक्कड़ों की तरह,
जिंदगी भी जी ली फकीरों की तरह,
मीलों की दूरी नाप दी,दो वक़्त की रोटी के लिये ,
बड़ी मशक्कत की,हर एक दिन गुजारने के लिये ,
हर सवाल सुलझाने के लिये,
हर मुसीबत से छुटकारा पाने के लिये ,
कभी मयस्सर न हुआ चैन,न सुकून से कटे दिन,
बार बार तबाह किया,आँधियों ने नशेमन,
बार बार तिनके चुन बनती रही,
वक़्त के बहाव में बहती रही,
गिरती रही सम्हलती रही,
फिर भी सारी मुश्किलों में ,मुस्कुराती रही,जीती रही,
जिन्दादिली के साथ,
खुद का शुक्र अदा करती रही,
की उसने नवाज़ा है मुझे ,
अपने खजाने के ,एक नायाब नगीने से,
मेरा वारिस,जिसने कोई शिकायत किये बगैर,
मुफलिसी में भी अहम मकाम पाया है,
एहसास है जिसे मेरे दर्द ओ मुसीबत का,
और बन गया है जो,मेरा रहनुमा,मेरा मुहाफ़िज़!
शब्द अर्थ---मशक्कत--कड़ी मेहनत ,मुफलिसी--गरीबी,नवाज़ा--दिया,रहनुमा--देखभाल करनेवाला,
मुहाफ़िज़--रक्षक,नशेमन--घोंसला
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