दुआ ------
क्यों दुआ कुबूल नहीं होती मेरी ,
क्यूँ निगाह फेरे रहता है तू,
क्यूँ ख़ुशी दूर भागती है मुझसे ,
साधें अधूरी ,क्यूँ अधूरी है जुस्तजू,
हर वक़्त तुझे याद करती हूँ मैं,
क्यूँ भुला रहता है मुझे तू,
क्या इबादत में है मेरे खामी,
क्यों मुझसे गाफिल रहता है तू,
कहाँ जाऊं किसकी लूं पनाह,
मैं तो हमेशा से हूँ तेरी,
क्यों मेरा नहीं बन पाया है तू!
शब्द अर्थ----जुस्तजू-पाने की ख्वाहिश ,गाफिल -ध्यान न देना
दुनिया---
दुनिया क्या है मानो दगाबाजों का एक हुजूम,
या दौलत के पीछे भागती दीवानावार भीड़,
बीच में है दौलत और इर्द गिर्द सारा जहाँ,
सारे रिश्ते सारे दोस्त सारे नेता,
जितनी दौलत ,उतनी इज्जत उतना दबदबा ,
कहाँ से आयी ? परवाह नहीं
इसका कोई रंग नहीं,
न काला न सफ़ेद,
चर्चे हों बदनामी हो,कोई फर्क नहीं,
कौन करेगा इन्साफ?
क्योंकि इस हम्माम में सब बेनकाब हैं ,
कमोबेश सभी एक से हैं,
गुनाह का एहसास ?
तौबा कीजिये जनाब,
दिल हो,जज़्बात हों, तब तो एहसास हो!
शब्द अर्थ----हम्माम--सामूहिक स्नान गृह,जज़्बात--भाव
क्यों दुआ कुबूल नहीं होती मेरी ,
क्यूँ निगाह फेरे रहता है तू,
क्यूँ ख़ुशी दूर भागती है मुझसे ,
साधें अधूरी ,क्यूँ अधूरी है जुस्तजू,
हर वक़्त तुझे याद करती हूँ मैं,
क्यूँ भुला रहता है मुझे तू,
क्या इबादत में है मेरे खामी,
क्यों मुझसे गाफिल रहता है तू,
कहाँ जाऊं किसकी लूं पनाह,
मैं तो हमेशा से हूँ तेरी,
क्यों मेरा नहीं बन पाया है तू!
शब्द अर्थ----जुस्तजू-पाने की ख्वाहिश ,गाफिल -ध्यान न देना
दुनिया---
दुनिया क्या है मानो दगाबाजों का एक हुजूम,
या दौलत के पीछे भागती दीवानावार भीड़,
बीच में है दौलत और इर्द गिर्द सारा जहाँ,
सारे रिश्ते सारे दोस्त सारे नेता,
जितनी दौलत ,उतनी इज्जत उतना दबदबा ,
कहाँ से आयी ? परवाह नहीं
इसका कोई रंग नहीं,
न काला न सफ़ेद,
चर्चे हों बदनामी हो,कोई फर्क नहीं,
कौन करेगा इन्साफ?
क्योंकि इस हम्माम में सब बेनकाब हैं ,
कमोबेश सभी एक से हैं,
गुनाह का एहसास ?
तौबा कीजिये जनाब,
दिल हो,जज़्बात हों, तब तो एहसास हो!
शब्द अर्थ----हम्माम--सामूहिक स्नान गृह,जज़्बात--भाव
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