नाता------------
प्रभु का और भक्तों का नाता,
होता बस विश्वास का नाता,
सुन पुकार अपने भक्तों की,
हरदम वह दौड़ा आता।
भक्तों का क्षण-क्षण का लेखा,
उसके सब कर्मों का जोखा,
उसके पुण्य और उसके पाप,
प्रभु से कुछ भी ना छुपता।
मंदिर में मूर्ति की पूजा,
क्षमा याचना या अभयदान,
मन्नत और मनौती भी वह,
भक्तों की सब पूरी करता।
दूर नहीं वह बिल्कुल पास,
खींच निकाले भँवर निरास,
भक्त की सुन दारुण पुकार,
तत्क्षण ही वह प्रस्तुत होता।
यदि भक्तों को हो विश्वास अटल,
निर्भीक वह,खड़ा रहे अचल,
दयावान और कृपानिधान,
निश्चित ही स्व-अस्तित्व जताता!
शब्द अर्थ---लेख जोखा--हिसाब-किताब,अभयदान-प्राणदान
प्रभु का और भक्तों का नाता,
होता बस विश्वास का नाता,
सुन पुकार अपने भक्तों की,
हरदम वह दौड़ा आता।
भक्तों का क्षण-क्षण का लेखा,
उसके सब कर्मों का जोखा,
उसके पुण्य और उसके पाप,
प्रभु से कुछ भी ना छुपता।
मंदिर में मूर्ति की पूजा,
क्षमा याचना या अभयदान,
मन्नत और मनौती भी वह,
भक्तों की सब पूरी करता।
दूर नहीं वह बिल्कुल पास,
खींच निकाले भँवर निरास,
भक्त की सुन दारुण पुकार,
तत्क्षण ही वह प्रस्तुत होता।
यदि भक्तों को हो विश्वास अटल,
निर्भीक वह,खड़ा रहे अचल,
दयावान और कृपानिधान,
निश्चित ही स्व-अस्तित्व जताता!
शब्द अर्थ---लेख जोखा--हिसाब-किताब,अभयदान-प्राणदान
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