आइना -----
किस दर पे जाऊ तेरे दर को छोड़ कर?
कहाँ करूँ सजदा?किसे करूँ सजदा?
किससे करूँ फरियाद?
जो करे दिल के अरमानो को आबाद,
नहीं जानती दर कोई दूसरा,
तेरे सिवा नहीं कोई आसरा,
उंगली थाम के अब तक ,चलाता रहा है तू,
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ाता रहा है तू,
जब हुई बेघर ,आसरा बना है तू,
ग़मों की तल्ख़ धूप में,
घना साया बना है तू,
हम हैं खिलौने हाड मॉस के,
चलाता है तू ,जान है तू
हर घडी हर पल का तय शुदा हिसाब है तू,
हम हैं नादान और नासमझ,
रहबर तू ,निगहबान है तू,
हम नहीं थे ,तब भी था तू,
हम नहीं रहेंगे तब भी होगा तू,
वक़्त तू,वक़्त की हर घडी का गवाह तू,
मौजूद जर्रे जर्रे में,सारी कायनात है तू,
कोई नहीं निगाहों से तेरी ओझल,रहीम तू,करीम तू,
हमारा तो बागबां भी तू,और नाखुदा भी तू,
तूफानों से निकाल कर ,साहिल पे पहुंचाता रहा है तू,
दोस्त तू,हमराज तू,हमारा मसीहा है तू,
सिर्फ तू,सिर्फ तू,सिर्फ तू !
शब्द अर्थ---नाखुदा-- नाविक,तल्ख़--तीखी,सजदा--नमन
किस दर पे जाऊ तेरे दर को छोड़ कर?
कहाँ करूँ सजदा?किसे करूँ सजदा?
किससे करूँ फरियाद?
जो करे दिल के अरमानो को आबाद,
नहीं जानती दर कोई दूसरा,
तेरे सिवा नहीं कोई आसरा,
उंगली थाम के अब तक ,चलाता रहा है तू,
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ाता रहा है तू,
जब हुई बेघर ,आसरा बना है तू,
ग़मों की तल्ख़ धूप में,
घना साया बना है तू,
हम हैं खिलौने हाड मॉस के,
चलाता है तू ,जान है तू
हर घडी हर पल का तय शुदा हिसाब है तू,
हम हैं नादान और नासमझ,
रहबर तू ,निगहबान है तू,
हम नहीं थे ,तब भी था तू,
हम नहीं रहेंगे तब भी होगा तू,
वक़्त तू,वक़्त की हर घडी का गवाह तू,
मौजूद जर्रे जर्रे में,सारी कायनात है तू,
कोई नहीं निगाहों से तेरी ओझल,रहीम तू,करीम तू,
हमारा तो बागबां भी तू,और नाखुदा भी तू,
तूफानों से निकाल कर ,साहिल पे पहुंचाता रहा है तू,
दोस्त तू,हमराज तू,हमारा मसीहा है तू,
सिर्फ तू,सिर्फ तू,सिर्फ तू !
शब्द अर्थ---नाखुदा-- नाविक,तल्ख़--तीखी,सजदा--नमन
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