आब ए हयात-----
खुदा ने बख्शी थी आब-ए -हयात सी जिंदगी,
छलकती रही बूँद बूँद,
गिरती रही धूल में मिलती रही,
कितना कुछ था करने को हांसिल,
कामयाबी,अच्छे मकसद,और सवाब,
देखते रहे बस ,भीड़ में बनकर तमाशबीन,
पा सके न कोई मकाम,
जीते रहे ,बस जीने की रस्म अदा करते रहे,
पिछड़ गए जिंदगी की रफ़्तार से हम,
अब तो इस आब -ए -हयात का प्याला होने को है खाली,
चाँद बूँद बचने का एहसास,
मायूसी,बेचैनी,और बेकरारी,
मातम नाकामयाबी का ,
और अश्कों की झड़ी!
शब्द --अर्थ---आब-ए -हयात---स्वर्ग का पानी,सवाब--पुन्य ,मकाम-लक्ष्य
खुदा ने बख्शी थी आब-ए -हयात सी जिंदगी,
छलकती रही बूँद बूँद,
गिरती रही धूल में मिलती रही,
कितना कुछ था करने को हांसिल,
कामयाबी,अच्छे मकसद,और सवाब,
देखते रहे बस ,भीड़ में बनकर तमाशबीन,
पा सके न कोई मकाम,
जीते रहे ,बस जीने की रस्म अदा करते रहे,
पिछड़ गए जिंदगी की रफ़्तार से हम,
अब तो इस आब -ए -हयात का प्याला होने को है खाली,
चाँद बूँद बचने का एहसास,
मायूसी,बेचैनी,और बेकरारी,
मातम नाकामयाबी का ,
और अश्कों की झड़ी!
शब्द --अर्थ---आब-ए -हयात---स्वर्ग का पानी,सवाब--पुन्य ,मकाम-लक्ष्य
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