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रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !! {67} Meharbani !!

मेहरबानी ----------

आये थे तेरी महफ़िल में बड़ी शान से हम,
रुखसत हो रहे हैं बदनाम से हम,
तुझको माना था मोहसिन,
बहुत की,तेरी खिदमत,
सोचा था बहुत दूर तक,
साथ चलेंगे हम,
तेरी मेहरबानियों का क़र्ज़,
चुकाते रहे हरदम,
जितना तू काम आया हमारे,
उतने ही तेरे काम आए हम,
यक ब यक तूने कर लिया किनारा,
तो बहुत हैरान हुए हम,
गर तूने समझा था इसे सौदा,
तो बराबरी का रहा हिसाब,
न फायदा तुझे हुआ ,न घाटे में रहे हम,
सोचेंगे शायद यही हो मुक्कद्दर में लिखा हुआ,
कोई शिकवा न शिकायत करेंगे हम,
तू हमेशा बनाए रखता है भरम,
बस ऐसी ही कुछ तदबीर ,करते रहेंगे हम,
राहें जुदा,जिंदगी जुदा,
तरीके जुदा,फलसफे जुदा,
शायद ही कभी एक राह पे,
चल पाएंगे  हम!

शब्द अर्थ--रुखसत--विदा,महफ़िल--सभा,मुकद्दर-किस्मत,शिकवा--उलाहना,तदबीर--प्रयास,फलसफा-दर्शन,मोहसीन-एहसान करनेवाला,खिदमत--सेवा 

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