नज़रें -----
वो बातें जो जुबां कह नहीं पातीं,
बयां होतीं हैं नज़रों से,
नफरत और हिकारत,गुस्सा और तिज़ारत ,
निज़ामों की सियासत,प्यार और मोहब्बत,
बड़ी कारसाज़ होती हैं ये,
हर शख्स की,पूरी शख्सियत का आईना होतीं हैं ये,
नेता जनता से,मुजरिम कानून से,इसीलिए चुराते हैं नज़रे,
कहीं कर न दें बयां नज़रें,
वो जो छुपा रख्खा है दिल में,
खामखाँ ही कर न दें अयाँ नज़रें
बचने की करतें हैं पूरी कोशिश,
जकड न पाये लोगों की नज़रें,
मगर ताड़ लेती हैं लोगों की नज़रें,
चोर पुलिस की तरह लुकाछिपी खेलती नज़रें!
शब्द अर्थ---हिकारत-किसी को क़मतर जान कर नफरत करना,तिज़ारत -व्यापार,अयाँ -प्रकट
वो बातें जो जुबां कह नहीं पातीं,
बयां होतीं हैं नज़रों से,
नफरत और हिकारत,गुस्सा और तिज़ारत ,
निज़ामों की सियासत,प्यार और मोहब्बत,
बड़ी कारसाज़ होती हैं ये,
हर शख्स की,पूरी शख्सियत का आईना होतीं हैं ये,
नेता जनता से,मुजरिम कानून से,इसीलिए चुराते हैं नज़रे,
कहीं कर न दें बयां नज़रें,
वो जो छुपा रख्खा है दिल में,
खामखाँ ही कर न दें अयाँ नज़रें
बचने की करतें हैं पूरी कोशिश,
जकड न पाये लोगों की नज़रें,
मगर ताड़ लेती हैं लोगों की नज़रें,
चोर पुलिस की तरह लुकाछिपी खेलती नज़रें!
शब्द अर्थ---हिकारत-किसी को क़मतर जान कर नफरत करना,तिज़ारत -व्यापार,अयाँ -प्रकट
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