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रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !! DHUAAN {31}DO RANG {32}

धुँआ --------

तनहा होते हैं कुछ दर्द,
किसी से बांटे नहीं जाते ,
आँखों से बहते हैं खामोश,
जुबां पर लाये नहीं जाते,
फीकी मुस्कराहट के पीछे से झाँकते हैं,
तमाम कोशिशों से भी छुपाये नहीं जाते।
फ़ैल जाते हैं पूरे माहौल पर,
धुंए की इस काली चादर से हम निकल नहीं पाते,
घुटता रहता है दम धीरे धीरे ,
खुली हवा ये कभी जुटा  नहीं पाते,
बिखरे होते हैं ये जिंदगी के कई पन्नो पर,
इस किताब से ये पन्ने कभी फाड़े नहीं जाते,
वक़्त की हवा में उड़ उड़ कर खुलते हैं,
इसीलिए ये कभी भुलाये नहीं जाते!


दो रंग ----------

दो जून रोटी के लिए,
कोई करे कड़ी मशक्कत,
किसी के घर में रेलमपेल,
बनी है दौलत हज़ार नेमत,
शैतान बाजी मारता दिखता,
ग़मगीन है नेकनीयत,
ईमान और अच्छाई बन गयी,
उसके लिए एक फजीहत,
बेईमान गर मालिक है तो,
सच्चे मातहत की शामत,
अगर मातहत है बेइमान तो,
मालिक के लिए हराम है राहत,
अपना गिरेबां न झाकें कोई,
ना बदले कोई अपनी आदत,
हर शख्स हमें दिखाई पड़ता,
दूजे को देता हुआ नसीहत,
मुंह पर सब मीठे ही रहते,
दिल में पाले सख्त अदावत,
अब तो यारों बनी तिजारत,
मंदिर मस्जिद में रब की इबादत,
हम क्या थे ,हम क्या हो गए,
भूल गए वह शान ओ शौकत,
आज़ादी की खूनी कीमत,
शहीदों की नायाब शहादत!

शब्द अर्थ----मशक्कत--कड़ी मेहनत ,फजीहत--मुसीबत,शामत--मौत की तरह की मुसीबत,नसीहत --सीख,तिजारत--व्यापार ,इबादत--पूजा,शहादत--प्राणोत्सर्ग,नायाब-अतुलनीय 

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