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रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !!{39} Gafil !! {40} Habeeb !!

गाफिल----
जाने कब से सो रही थी मैं,
थी नींद में गाफिल,
दुनिया में हर कोई सजाता रहा,
अपनी अपनी महफ़िल,
ख्वाब मुकम्मल होते रहे सबके,
मैं कुछ भी न कर सकी हांसिल,
करती रही खुद से बहस मुबाहिसा,
देती रही खुद को दलील,
खुद ही क़त्ल करती रही ख्वाबों का,
बन गयी खुद की कातिल,
कश्ती को अपनी डुबोती रही अक्सर,
जब सामने होता था साहिल,
जिंदगी चलती रही,मैं भी चलती रही साथ साथ,
तय न थी ,सो मिली नही मंज़िल,
एक मुश्किल पार की बमुश्किल,
हाज़िर थी दूसरी मुश्किल,
अलमस्त रही आज में हरदम,
भूल कर अपना मुस्तकबिल!

शब्द अर्थ---गाफिल-खोई हुई,मुकम्मल--पूर्ण,बहस मुबाहिसा--वादविवाद,मुस्तकबिल--भविष्य 

हबीब----

कौन होता है किसके करीब,
वक़्त गुजरने के साथ,
सारे चेहरे धुंधलाने लगते हैं,
और हो जाते हैं अजीब,
अक्सर इन्सान तोहमत लगाता है,
कहता है इसे अपना नसीब,
चारों ओर फैले हुए हैं वो,
जो रकाबत दिखाए बगैर,होते हैं रकीब,
हर रोज घायल होता है एक रिश्ता,
हर रोज टूटता है एक दिल,
हर रोज चढ़ाया जाता है,
एक ना एक अच्छा ख़याल सलीब,
मशीनों की सी जिंदगी,मशीनों से इंसान सभी,
लेन  देन  सारा मशीनी,कौन है किसका हबीब!

शब्द अर्थ----हबीब--प्रिय,तोहमत--आक्षेप,रकीब--दुश्मन,रकाबत--दुश्मनी ,सलीब--मृत्युदंड 




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