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रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !! {56} Khanjar !! {57} Khuda !!

खंजर--------

हर दिन एक नया राज होता है फाश ,
आँखें रह जाती हैं खुली की खुली,
दांतों तले मेरी उंगली दब जाती है,
दिल और दिमाग दोनों हो जाते हैं सुन्न,
रूह में सनसनी सी छा जाती है,
हर दिन दिल समझाता है मुझे,
दिमाग देता है नसीहत,
हर दिन एक नया सबक,देता है मुझे,
हर दिन उलट जाती है एक नकाब,
या नकाब के  नीचे की नकाब,
या उससे भी नीचे की नकाब,
फिर भी उस शख्स का असली चेहरा नज़र नहीं आता मुझे,
कितने लोग?
कितने सारे लोग इर्द गिर्द,
सभी न जाने कितनी नकाबें लगाये घूम रहे हैं,
बातें कर रहे हैं मोहब्बत भरी,
मुस्कुरा रहे हैं ,
आपस में गले मिल रहे हैं,
वे शायद इस दौरान,
ढूंढ रहे हैं,आपकी पीठ में वह नर्म जगह, 
जहाँ हाथ में पकड़ा धार दार खंजर घोंप सकें!

खुदा ----------------------

हर इंसान अपने आप में मदरसा है एक,
रोज बा रोज उसका हर ख़याल हर करतब ,
आपको सबक सिखाता है एक,
परत दर परत खुलता है हर पल,
हर परत होती है हैरतअंगेज ,
उसके वजूद में होते हैं इतने पेंचो खम,
वो क्या है,क्या नहीं है,
बना रहता है हमेशा ये वहम,
खुदा ने तो उसे पैदा किया था नेक,
क्यों दिल में उसके पैदा हुआ फरेब,
क्या उसने खुदा  से डरना छोड़ दिया ,
या समझने लगा है वह,खुद को खुदा एक!

शब्द--अर्थ--मदरसा--पाठशाला।हैरत अंगेज--आश्चर्यजनक 



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