हिसाब--------
आज करने हिसाब बैठी हूँ,
किस किस ने की बेवफाई ,
और किसने निभाई है वफ़ा,
कई नाम हैं मेरी इस फेहरिस्त में,
सख्त हूँ जिनसे खफा,
बेवफाई किस्म किस्म की,
किस्म किस्म की है जफा,
जिन्हें समझा मैंने अज़ीज़,
वे दुनियावी रिश्तेदार,
जब थी जरूरत,हौंसले की,कर दिया रफा दफा,
चंद शख्स ऐसे भी थे,जो बन गए मोहसिन मेरे,
हर हाल में जो साथ रहे,दुआ उनको सौ सौ दफा,
कई नाम ऐसे भी हैं जो,बन गए जान-ए -मर्ज ,
और किसी का नाम है ,जो हर मर्ज़ की मनो शफा!
शब्द - अर्थ--वफ़ा-कृतज्ञता ,जफा-कृ त घ्न ता ,अज़ीज़--प्रिय,रफा-दफा-भगा देना,दफा-बार,मोहसिन-शुभचिंतक,जान-ए -मर्ज़--जी का जंजाल,शफा-इलाज
हुजूम-----
इंसान की जिंदगी में होता है लोगों का हुजूम पहले,
हँसते खिलखिलाते लोग,
ठहाके लगाते वक़्त बिताते लोग,
फिर एक एक शख्स एक एक बार ,
मांगता है उससे उधार,
पैसा,वक़्त,सिफारिश,या ऐतबार,
यह दोस्त भी हो सकता है,या हो सकता है रिश्तेदार ,
गर दिया उधार तब भी टूटता है,
न दिया अगर टूटता है तब भी,
इस तरह छंटने लगाती है भीड़,
इस तरह हर आदमी,
उसके हाथ में दे देता है एक एक पत्थर,
कहता है,मारो!
मारो! उस तस्वीर पर मेरी,
जो बना रखी है तुमने अपने दिल में,
और फिर उसके इर्द गिर्द रह जाते हैं सिर्फ वो,
जो खुश होतें हैं आपस में खुशियाँ बाँट कर,
तसल्ली होती है जिनके साथ गम बाँट कर!
शब्द-अर्थ--ऐतबार-विश्वास
आज करने हिसाब बैठी हूँ,
किस किस ने की बेवफाई ,
और किसने निभाई है वफ़ा,
कई नाम हैं मेरी इस फेहरिस्त में,
सख्त हूँ जिनसे खफा,
बेवफाई किस्म किस्म की,
किस्म किस्म की है जफा,
जिन्हें समझा मैंने अज़ीज़,
वे दुनियावी रिश्तेदार,
जब थी जरूरत,हौंसले की,कर दिया रफा दफा,
चंद शख्स ऐसे भी थे,जो बन गए मोहसिन मेरे,
हर हाल में जो साथ रहे,दुआ उनको सौ सौ दफा,
कई नाम ऐसे भी हैं जो,बन गए जान-ए -मर्ज ,
और किसी का नाम है ,जो हर मर्ज़ की मनो शफा!
शब्द - अर्थ--वफ़ा-कृतज्ञता ,जफा-कृ त घ्न ता ,अज़ीज़--प्रिय,रफा-दफा-भगा देना,दफा-बार,मोहसिन-शुभचिंतक,जान-ए -मर्ज़--जी का जंजाल,शफा-इलाज
हुजूम-----
इंसान की जिंदगी में होता है लोगों का हुजूम पहले,
हँसते खिलखिलाते लोग,
ठहाके लगाते वक़्त बिताते लोग,
फिर एक एक शख्स एक एक बार ,
मांगता है उससे उधार,
पैसा,वक़्त,सिफारिश,या ऐतबार,
यह दोस्त भी हो सकता है,या हो सकता है रिश्तेदार ,
गर दिया उधार तब भी टूटता है,
न दिया अगर टूटता है तब भी,
इस तरह छंटने लगाती है भीड़,
इस तरह हर आदमी,
उसके हाथ में दे देता है एक एक पत्थर,
कहता है,मारो!
मारो! उस तस्वीर पर मेरी,
जो बना रखी है तुमने अपने दिल में,
और फिर उसके इर्द गिर्द रह जाते हैं सिर्फ वो,
जो खुश होतें हैं आपस में खुशियाँ बाँट कर,
तसल्ली होती है जिनके साथ गम बाँट कर!
शब्द-अर्थ--ऐतबार-विश्वास
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