दगाबाज़---------
भूल जाना दगा देकर,
दगाबाजों की फितरत होती है,
घुल मिल जाना जिंदगी में,
जायजा लेना कि क्या हो सकता है हांसिल,
यकीन दिल देना की वो ही है आपका सबसे बड़ा हमदर्द,
और वो ही पहुंचा सकता है आपको बुलंदियों पर ,
चुटकी बजाते ही कर सकता है हर मर्ज़ का इलाज ,
और हर मुसीबत से छुटकारा दिल सकता है,
जब यकीन हो जाता है पुख्ता ,
और आप सौंप देते हैं उसे,
अपना दिल,अपनी दौलत,
अपना यकीन और वजूद,
तब चुपके से नज़रे बचाकर,
आपको लूट कर,
कभी कंगाल बना कर,
चल देता है,कभी न लौटने के लिए,
और जो कभी नज़र आये,
टकरा जाये,
मुस्कुरा देता है बेशर्मों की तरह ,
शर्मिंदा तक नहीं होता ,
क्योंकि दगाबाजों में नहीं होती है शराफत!
शब्द अर्थ----फितरत-स्वभाव,पुख्ता - पक्का
भूल जाना दगा देकर,
दगाबाजों की फितरत होती है,
घुल मिल जाना जिंदगी में,
जायजा लेना कि क्या हो सकता है हांसिल,
यकीन दिल देना की वो ही है आपका सबसे बड़ा हमदर्द,
और वो ही पहुंचा सकता है आपको बुलंदियों पर ,
चुटकी बजाते ही कर सकता है हर मर्ज़ का इलाज ,
और हर मुसीबत से छुटकारा दिल सकता है,
जब यकीन हो जाता है पुख्ता ,
और आप सौंप देते हैं उसे,
अपना दिल,अपनी दौलत,
अपना यकीन और वजूद,
तब चुपके से नज़रे बचाकर,
आपको लूट कर,
कभी कंगाल बना कर,
चल देता है,कभी न लौटने के लिए,
और जो कभी नज़र आये,
टकरा जाये,
मुस्कुरा देता है बेशर्मों की तरह ,
शर्मिंदा तक नहीं होता ,
क्योंकि दगाबाजों में नहीं होती है शराफत!
शब्द अर्थ----फितरत-स्वभाव,पुख्ता - पक्का
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें