दस्तक------
अक्सर सोचा करती हूँ मैं,
गर ऐसा न हुआ होता,तो अच्छा होता,
वैसा न हुआ होता तो अच्छा होता,
गर थाम लेती सुनहरे मौके का दामन,
सुन पाती खुशियों की आहट ,
दिलके दरवाजों पर पड़ती दस्तक,
आज भी न चुभती होती दिल में फांस,
न उठ रही होती जहन में कसक,
न जलाती अंगारों की कोई दहक!
शब्द अर्थ---जहन --मानस
दस्तूर -------
नहीं कोई किसी का मसीहा ,
नहीं किसी को किसी से है निस्बत,
नहीं कोई किसी का मुहाफ़िज़,
नहीं किसी को किसी से है मोहब्बत,
नहीं चाहता कोई तरक्की किसीकी,
नहीं करता किसी की हिमायत,
इतना शातिर हो गया है इंसान,
छुपा जाता है अपनी नीयत ,
नहीं रहम करता कोई किसी पर
यही दस्तूर ,यही है असलियत !
शब्द अर्थ----दस्तूर--प्रथा,निस्बत--अपनापन,मुहाफ़िज़ --रखवाला
अक्सर सोचा करती हूँ मैं,
गर ऐसा न हुआ होता,तो अच्छा होता,
वैसा न हुआ होता तो अच्छा होता,
गर थाम लेती सुनहरे मौके का दामन,
सुन पाती खुशियों की आहट ,
दिलके दरवाजों पर पड़ती दस्तक,
आज भी न चुभती होती दिल में फांस,
न उठ रही होती जहन में कसक,
न जलाती अंगारों की कोई दहक!
शब्द अर्थ---जहन --मानस
दस्तूर -------
नहीं कोई किसी का मसीहा ,
नहीं किसी को किसी से है निस्बत,
नहीं कोई किसी का मुहाफ़िज़,
नहीं किसी को किसी से है मोहब्बत,
नहीं चाहता कोई तरक्की किसीकी,
नहीं करता किसी की हिमायत,
इतना शातिर हो गया है इंसान,
छुपा जाता है अपनी नीयत ,
नहीं रहम करता कोई किसी पर
यही दस्तूर ,यही है असलियत !
शब्द अर्थ----दस्तूर--प्रथा,निस्बत--अपनापन,मुहाफ़िज़ --रखवाला
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