दौलत------पुनः प्रकाशित
गरीब है मोहताज़ ए दौलत,
रोटी की भूख,ख्वाहिशों की प्यास है दौलत,
ईमान के दिल की फांस है दौलत,
अमीर के सर पे एक ताज है दौलत,
रब की पहुंचाई हुई सौगात है दौलत,
इज्ज़त है दौलत,मोहब्बत है दौलत,
हर गुनाह की रूह है दौलत,
हर रूह का छुपा हुआ गुनाह है दौलत,
बगैर इसके जिंदगी बस लानत है लानत,
क्या स्याह और क्या शफ्फाफ है दौलत,
कितनी दूर कितनी पास है दौलत,
हर मर्ज़ की शफा,हर चीज की खरीदार है दौलत,
अब तो बन गयी है,इंसान की पहचान ये दौलत!
शब्द अर्थ----रूह--आत्मा,शफा--इलाज,शफ्फाफ-सफ़ेद
प्रकाशित----"मज़मून "में नवम्बर 2005,तथा रोशानी दर्शन पाक्षिक में।
गरीब है मोहताज़ ए दौलत,
रोटी की भूख,ख्वाहिशों की प्यास है दौलत,
ईमान के दिल की फांस है दौलत,
अमीर के सर पे एक ताज है दौलत,
रब की पहुंचाई हुई सौगात है दौलत,
इज्ज़त है दौलत,मोहब्बत है दौलत,
हर गुनाह की रूह है दौलत,
हर रूह का छुपा हुआ गुनाह है दौलत,
बगैर इसके जिंदगी बस लानत है लानत,
क्या स्याह और क्या शफ्फाफ है दौलत,
कितनी दूर कितनी पास है दौलत,
हर मर्ज़ की शफा,हर चीज की खरीदार है दौलत,
अब तो बन गयी है,इंसान की पहचान ये दौलत!
शब्द अर्थ----रूह--आत्मा,शफा--इलाज,शफ्फाफ-सफ़ेद
प्रकाशित----"मज़मून "में नवम्बर 2005,तथा रोशानी दर्शन पाक्षिक में।
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