अदायगी----
बरसों सुलगता रहा दिल मेरा,
अब जा के धुँआ उठ्ठा है,
इसकी गर्मी से पिघलते मेरे जज्बात ,
हर्फ़ बन कर बिखरने लगे हैं,
यह सुलगन यह तपिश,
महसूस मुझे होती है,
किसी और को शायद ही इसका गुमां होता है,
कितनी कारगर है यह खलिश,
कितनी पुरसुकूं है यह तपिश,
नहीं जानती मैं,
कि यह कसक यह चुभन,
इतनी खूबसूरत होगी,
और इससे भी हसीन होगी,
इसकी अदायगी!
शब्द अर्थ --अदायगी-प्रस्तुति,गुमां -मालूम होना,कारगर-सार्थक,खलिश-आतुरता,पुरसुकून-संतोषप्रद
हसीं-ख़ूबसूरत
बरसों सुलगता रहा दिल मेरा,
अब जा के धुँआ उठ्ठा है,
इसकी गर्मी से पिघलते मेरे जज्बात ,
हर्फ़ बन कर बिखरने लगे हैं,
यह सुलगन यह तपिश,
महसूस मुझे होती है,
किसी और को शायद ही इसका गुमां होता है,
कितनी कारगर है यह खलिश,
कितनी पुरसुकूं है यह तपिश,
नहीं जानती मैं,
कि यह कसक यह चुभन,
इतनी खूबसूरत होगी,
और इससे भी हसीन होगी,
इसकी अदायगी!
शब्द अर्थ --अदायगी-प्रस्तुति,गुमां -मालूम होना,कारगर-सार्थक,खलिश-आतुरता,पुरसुकून-संतोषप्रद
हसीं-ख़ूबसूरत
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