संबंध ------------
बड़े नाज़ुक होते हैं ये,
बड़े मज़बूत भी होते,
कैसा यह विरोधाभास,
कठिन बहुत है इसका कयास,
पतली सी ये रेशम डोरी,
मज़बूत इतनी की जाए न तोड़ी,
यदि पड जाए इसमें गाँठ,
किसी तौर भी जाए न खोली,
नाज़ुक से शिशु के जैसे,
ध्यान हटे तो पड़े दरार,
छुई मुई के पौधे जैसे,
छूते ही मुरझा जाते हैं,
औपचारिक से जो होते हैं,
वे रह जाते सदा बने,
रक्त से जुड़े होते दीगर,
इन्हें सम्हालना होता दुष्कर,
थोड़ी सी हो जाए चूक,
तुरतफुरत ये जाएं टूट!
शब्द अर्थ--कयास--अंदाज़,दुष्कर--कठिन,दीगर--विशेष,छुईमुई --एक पौधा जो छूते ही मुरझा जाता है
बड़े नाज़ुक होते हैं ये,
बड़े मज़बूत भी होते,
कैसा यह विरोधाभास,
कठिन बहुत है इसका कयास,
पतली सी ये रेशम डोरी,
मज़बूत इतनी की जाए न तोड़ी,
यदि पड जाए इसमें गाँठ,
किसी तौर भी जाए न खोली,
नाज़ुक से शिशु के जैसे,
ध्यान हटे तो पड़े दरार,
छुई मुई के पौधे जैसे,
छूते ही मुरझा जाते हैं,
औपचारिक से जो होते हैं,
वे रह जाते सदा बने,
रक्त से जुड़े होते दीगर,
इन्हें सम्हालना होता दुष्कर,
थोड़ी सी हो जाए चूक,
तुरतफुरत ये जाएं टूट!
शब्द अर्थ--कयास--अंदाज़,दुष्कर--कठिन,दीगर--विशेष,छुईमुई --एक पौधा जो छूते ही मुरझा जाता है
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