रिश्ते--------------
मैंने देखा है रिश्तों का खोखलापन,
दिल में कुछ और जुबां पर कुछ और,
खो गया माधुर्य ,नहीं रहा गांभीर्य ,
आश्चर्यजनक है उथलापन,
निभाते हैं सारे,बस दुनियादारी,
होठों पर हास्य,मन में गाली,
सबके हैं जीवन अलग,ध्येय अलग,
इसीलिए हैं स्वार्थ अलग,
करते हैं प्रयास सिर्फ अपने लिए,
धन का व्यय,सिर्फ अपने लिए,
समय का उपयोग,सिर्फ अपने लिए,
नीव के ये तीनो स्तम्भ निकलने पर क्या है शेष?
एक नाटक?एक आडम्बर?
रिश्तों के अवशेष?
शब्द--अर्थ--आडम्बर--दिखावा,स्तंभ --मीनार,अवशेष--खंडहर
मैंने देखा है रिश्तों का खोखलापन,
दिल में कुछ और जुबां पर कुछ और,
खो गया माधुर्य ,नहीं रहा गांभीर्य ,
आश्चर्यजनक है उथलापन,
निभाते हैं सारे,बस दुनियादारी,
होठों पर हास्य,मन में गाली,
सबके हैं जीवन अलग,ध्येय अलग,
इसीलिए हैं स्वार्थ अलग,
करते हैं प्रयास सिर्फ अपने लिए,
धन का व्यय,सिर्फ अपने लिए,
समय का उपयोग,सिर्फ अपने लिए,
नीव के ये तीनो स्तम्भ निकलने पर क्या है शेष?
एक नाटक?एक आडम्बर?
रिश्तों के अवशेष?
शब्द--अर्थ--आडम्बर--दिखावा,स्तंभ --मीनार,अवशेष--खंडहर
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