देवी माँ की मूर्ती तो कोई उत्तर दे नहीं सकती थी। अंजुरी गहन विषाद में डूब गई। उसे कोई मार्ग नहीं दिखाई पड़ रहा था। उसे कमलेश्वर के बिना अपना जीवन एक निस्तब्ध नीरव खँडहर सा प्रतीत हो रहा था। इस एक विचार के अतिरिक्त और कोई भी विचार उसके मन में नहीं आ रहा था। वह मुड़ कर उसी छुपे हुए स्थान पर गई जहाँ कई बार वह कमलेश्वर के साथ बैठी थी और कई मधुर स्मृतियाँ वहां बसी हुईं थीं। वह बैठ गई। फिर से उसकी रुलाई फूट पडी। अचानक ही उसे कुछ सूझा ,वह उठी और ------
उस दिन महाविद्यालय में सभी कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हुए। इस बार मुख्य अतिथि हॉस्पिटल के सबसे बड़े डॉक्टर साहब थे। रात्री भोज भी नौ बजे तक समाप्त हो गया था। तहसीलदार साहब की जीप भी लगी थी अंजुरी को ले जाने के लिए। सभी मेहमान, छात्र छात्राएं,और प्रोफेसर्स भी निकल कर जाने लगे तो ड्राइवर रघुनाथ ने अंदर आकर पूछा "अंजुरी बेबी कहाँ हैं ?" सभी ने यही कहा होंगी यहीं कहीं ,प्रोग्राम तक तो यहीं थी। लेकिन जब रामदयाल और रघुनाथ ने सभी क्लास रूम्स चेक किये और वह नहीं मिली तो बात चिंताजनक हो गई।
रघुनाथ जीप लेकर वापस गया और तहसीलदार साहब को बताया। वे चौंक गए। अंजना भी चिंतित हो गई। इस बार वे दोनों जीप में बैठ कर महा विद्यालय पहुँचे। प्राचार्य महोदय भी चिंतित हो गए। शायद किसी सहेली के घर ना चली गई हो ,वे सभी लगभग सभी छात्राओं के घर जाकर देख आये और सभी जगह से यह तो पता चला कि अंजुरी ने कार्यक्रम में भाग लिया था उसके बाद से वह दिखाई भी नहीं पडी। यह अत्यंत ही चिंता जनक बात थी।
तहसीलदार साहब अब सीधे पुलिस स्टेशन चले गए। युवा पुलिस इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी ने उनकी बात सुनी और एक एफ आई आर भी दर्ज़ की। उन्होंने तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी तथा प्राचार्य महोदय को भी घर जाने को कहा। तब तक रात के साडे बारह बज चुके थे। --क्रमशः------
उस दिन महाविद्यालय में सभी कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हुए। इस बार मुख्य अतिथि हॉस्पिटल के सबसे बड़े डॉक्टर साहब थे। रात्री भोज भी नौ बजे तक समाप्त हो गया था। तहसीलदार साहब की जीप भी लगी थी अंजुरी को ले जाने के लिए। सभी मेहमान, छात्र छात्राएं,और प्रोफेसर्स भी निकल कर जाने लगे तो ड्राइवर रघुनाथ ने अंदर आकर पूछा "अंजुरी बेबी कहाँ हैं ?" सभी ने यही कहा होंगी यहीं कहीं ,प्रोग्राम तक तो यहीं थी। लेकिन जब रामदयाल और रघुनाथ ने सभी क्लास रूम्स चेक किये और वह नहीं मिली तो बात चिंताजनक हो गई।
रघुनाथ जीप लेकर वापस गया और तहसीलदार साहब को बताया। वे चौंक गए। अंजना भी चिंतित हो गई। इस बार वे दोनों जीप में बैठ कर महा विद्यालय पहुँचे। प्राचार्य महोदय भी चिंतित हो गए। शायद किसी सहेली के घर ना चली गई हो ,वे सभी लगभग सभी छात्राओं के घर जाकर देख आये और सभी जगह से यह तो पता चला कि अंजुरी ने कार्यक्रम में भाग लिया था उसके बाद से वह दिखाई भी नहीं पडी। यह अत्यंत ही चिंता जनक बात थी।
तहसीलदार साहब अब सीधे पुलिस स्टेशन चले गए। युवा पुलिस इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी ने उनकी बात सुनी और एक एफ आई आर भी दर्ज़ की। उन्होंने तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी तथा प्राचार्य महोदय को भी घर जाने को कहा। तब तक रात के साडे बारह बज चुके थे। --क्रमशः------
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