इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी प्राचार्य महोदय से आवश्यकता पड़ने पर फिर आने की बात कह कर चलने लगे ,उन्होंने तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी को घर जाने को कहा और आश्वासन दिया कि वे स्वयं सम्पूर्ण दक्षता तथा क्षमता के साथ उनकी बेटी को ढूंढने का प्रयास करेंगे। अंजना ठाकुर की आँखों से अविरल अश्रु धारा बह निकली,अनमोल ठाकुर की आँखें भी रह रह कर डबडबा जाती थीं। वे अपनी जीप की तरह बढ़ गए और इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी अपनी जीप की तरफ बढ़ गए।
उस दिन महाविद्यालय में पढाई तो होनी ही नहीं थी पहले ही छात्रों छात्राओं को बताया जा चुका था। बुलाना आवश्यक इसलिए था कि,पिछले दिन कार्यक्रम में लिए हुए सभी के कपडे तथा अन्य प्रॉप लौटाने थे। जल्दी छुट्टी हो गई। कमलेश्वर के लिए तो अंजुरी की अनुपस्थिति उसकी स्वयं की वर्तमान परिस्थिति को और भी दुरूह बना रही थी। वह घर जाकर ,अपने कमरे के बिस्तर पर पड़ गया। दो दिन की विपरीत परिस्थितियों ने उसे अत्यंत निराश कर दिया था। वह शिथिल सा आँखें बंद कर छत की और ताकता रहा और ना जाने कब उसकी आँख लग गई।
शाम पांच बजे रामू काका द्वारा जोर जोर से दरवाज़ा पीटने पर वह चौंक कर उठा। रामू काका ने बोला ,नीचे पुलिस इंस्पेक्टर साहब आये हैं ,आपको बुला रहे हैं ,वह सन्न रह गया ,ठंडा पसीना उसके चेहरे पर दृष्टिगत होने लगा। भय की एक लहर सी उसकी रीढ़ में दौड़ गई " आता हूँ ,बोल कर वह शर्ट बदलने लगा। वह तेजी से सीढ़ियां उतरते हुए हाल में पहुंचा। इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी ,सोफे पर बैठे थे रामू काका पहले ही चाय लेकर रख चुके थे ,प्लेट में बिस्किट भी रखे थे।
कमलेश्वर ने नमस्ते की और सामान्य दिखते हुए ,सामने के सोफे पर जा बैठा। उसका इंस्पेक्टर से पहली बार सामना रहा था ,जबकि रतनगढ़ में आने वाला प्रत्येक थाना इंचार्ज ,विश्वनाथ सिंह से मिलने आकर अवश्य ही एक औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराता था। ---क्रमशः -----
उस दिन महाविद्यालय में पढाई तो होनी ही नहीं थी पहले ही छात्रों छात्राओं को बताया जा चुका था। बुलाना आवश्यक इसलिए था कि,पिछले दिन कार्यक्रम में लिए हुए सभी के कपडे तथा अन्य प्रॉप लौटाने थे। जल्दी छुट्टी हो गई। कमलेश्वर के लिए तो अंजुरी की अनुपस्थिति उसकी स्वयं की वर्तमान परिस्थिति को और भी दुरूह बना रही थी। वह घर जाकर ,अपने कमरे के बिस्तर पर पड़ गया। दो दिन की विपरीत परिस्थितियों ने उसे अत्यंत निराश कर दिया था। वह शिथिल सा आँखें बंद कर छत की और ताकता रहा और ना जाने कब उसकी आँख लग गई।
शाम पांच बजे रामू काका द्वारा जोर जोर से दरवाज़ा पीटने पर वह चौंक कर उठा। रामू काका ने बोला ,नीचे पुलिस इंस्पेक्टर साहब आये हैं ,आपको बुला रहे हैं ,वह सन्न रह गया ,ठंडा पसीना उसके चेहरे पर दृष्टिगत होने लगा। भय की एक लहर सी उसकी रीढ़ में दौड़ गई " आता हूँ ,बोल कर वह शर्ट बदलने लगा। वह तेजी से सीढ़ियां उतरते हुए हाल में पहुंचा। इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी ,सोफे पर बैठे थे रामू काका पहले ही चाय लेकर रख चुके थे ,प्लेट में बिस्किट भी रखे थे।
कमलेश्वर ने नमस्ते की और सामान्य दिखते हुए ,सामने के सोफे पर जा बैठा। उसका इंस्पेक्टर से पहली बार सामना रहा था ,जबकि रतनगढ़ में आने वाला प्रत्येक थाना इंचार्ज ,विश्वनाथ सिंह से मिलने आकर अवश्य ही एक औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराता था। ---क्रमशः -----
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