इंस्पेक्टर अनिरुद्ध के जाने के बाद विश्वनाथ सिंह हॉल में गहन विचारों में डूबे हुए थे और कमलेश्वर गहन नैराश्य में डूबा हुआ, उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि अंजुरी आखिर कहाँ चली गई ? अचानक ही विश्वनाथ सिंह उसके कमरे में आ गए। उन्होंने कुर्सी खींच ली,कमलेश्वर उठ कर बैठ गया। उन्होंने गहन दृष्टि डाली और पूछा ," तुमने उस लड़की अंजुरी से मिलना जुलना बंद किया या नहीं ? ""जी ! बस क्लास में ही है वह। ""प्रोग्राम देखने गए थे ? "जी "{ कमलेश्वर से पहले ही ज्ञात कर लिया था वह इस बार स्टेज पर परफॉर्म नहीं कर रहा था ,इसीलिये उन्होंने सगाई की तारीख और समय सुबह का रखा था } अंजुरी ने स्टेज पर परफॉर्म किया था ? जी ""इंस्पेक्टर ने क्या पूछा ? "अब कमलेश्वर सकपका गया ," जी बस यही कि कल कब देखा था ? "और कुछ ? "नहीं वो महाविद्यालय भी आये थे ,तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी भी ,उन्होंने क्लास में सभी से अंजुरी के बारे में पूछा। "तुमसे भी पूछा था ?"जी नहीं ""तुमसे क्लास में नहीं पूछा और यहाँ चला आया पूछने "हुंह ! "वैसे अचानक कहाँ चली गई होगी अंजुरी ?""मुझे नहीं मालूम ""तुम्हारी सगाई के बारे में किस किस को पता चला ?'जी सभी को "उनकी आँखें विस्फारित हो गईं "ज़रूर रणवीर सिंह के घर से बात बाहर गई "वे बड़बड़ाते हुए सीढ़ियों की ओर चले गए "इधर इंस्पेक्टर अनिरुद्ध भी कमलेश्वर के संक्षिप्त उत्तरों से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लग रहा था बात कुछ और ही है। "कमलेश्वर के पिता का प्रभावशाली होना और अंजुरी के पिता का भी प्रभावशाली होना इस केस को हाई प्रोफ़ाइल केस बना रहा था। "उन्होंने दूसरे दिन पुनः अन्वेषण करने का विचार किया। उन्हें कैलाश और प्रभा से कई सूत्र हाथ आने की अपेक्षा थी। रात हो आयी थी। वे अपने क्वार्टर पर आ गए किन्तु निद्रा उनकी आँखों से मीलों दूर थी। वे कागज़ कलम ले कर कल के अन्वेषण की योजना ,चरण दर चरण बनाने लगे। कितना भी हाई प्रोफ़ाइल केस क्यों ना हो कर्तव्य परायण अनिरुद्ध चौधरी के लिए यह केस चुनौतीपूर्ण था। --क्रमशः ----
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