अचानक सिंधु वर्गीस मैडम ने कहा ,"सर ,एक बात कहनी थी "अनिरुद्ध चौधरी ने प्रश्न वाचक दृष्टि से सिंधु मैडम की ओर देखा "सर ! कल सुबह हमने सभी को महाविद्यालय इसलिए बुलाया था,अंजुरी की ड्रेस भी सभी ड्रेसेस के साथ रखी हुई थी। " यह सुन कर ,वहां उपस्थित सभी लोग आश्चर्य में डूब गए। सभी के लिए यह कल्पना से परे था कि तीन एंगल्स से लिए फोटोज में बाकी छह लड़कियों के फोटो स्पष्ट थे ,अंजुरी का फोटो तीनो ही फोटोज में नहीं थे। लगभग डेढ़ हज़ार लोगों ने अंजुरी का डांस देखा,ईनाम की घोषणा भी हुई और अब वह फोटो में क्यों नही ?
अनिरुद्ध चौधरी फोटोज का लिफाफा लेकर उठ खड़े हुए ,उन्होंने प्राचार्य महोदय को नमस्ते की ,तहसीलदार साहब को और उनकी पत्नी को आश्वासन दिया ,"सर ! मैं अपनी ओर से कोई कोशिश न छोडूंगा,आप हौंसला रखिये "
अनिरुद्ध चौधरी अपनी जीप की ओर तथा तहसीलदार अनमोल चौधरी एवं अंजना चौधरी अपनी जीप की ओर चल पड़े। दोनों पति पत्नी गहन चिंता में डूबे हुए थे। परसों सुबह साढ़े नौ बजे अंजुरी घर से निकली थी। अनिरुद्ध चौधरी ने उनसे ढेरों सवाल भी पूछे ,जैसे क्या वो किसी रिश्तेदार के यहाँ शहर जा सकती है ? उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं हुआ ,लेकिन वे अभी ही पोस्ट ऑफिस जाकर फ़ोन द्वारा
पता करेंगे। उनकी एकमात्र रिश्तेदार अंजुरी की नानी है। अनिरुद्ध चौधरी ने प्रस्ताव रखा " आप अपनी जीप यहीं छोड़ दीजिये ,मेरे साथ चलिए थाने से फ़ोन कर लीजियेगा,मेरा भी काम हो जायेगा और मैं आपको यहीं छोड़ दूंगा। अनमोल ठाकुर को सुझाव अच्छा लगा और वे अनिरुद्ध चौधरी की जीप में जा बैठे। वे अगले दस मिनट में थाने जा पहुंचे।
उन्होंने अंजुरी की नानी के गांव के पोस्ट ऑफिस में फ़ोन लगाया। उन्होंने पूछा कि पता कर के बता दें कि क्या अंजुरी वहां पहुंची है ? यद्यपि उस काल में यह प्रश्न भी परिवार की मर्यादा के विपरीत था किन्तु यह अनिवार्य प्रश्न था जिसका उत्तर मिलना अन्वेषण को एक चरण आगे बढाने वाला था। और यह उत्तर "नहीं" में मिला था। नानी के घर जाकर ,एकमात्र पोस्टमैन पूछ कर आया था।
तभी कॉन्स्टेबल्स राजेश दवे और उमेश साहू दोनों ही तेजी से झपटते हुए अंदर आये ,कुछ बोलना चाहते थे किन्तु तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी को देख कर चुप हो गए ---क्रमशः
अनिरुद्ध चौधरी फोटोज का लिफाफा लेकर उठ खड़े हुए ,उन्होंने प्राचार्य महोदय को नमस्ते की ,तहसीलदार साहब को और उनकी पत्नी को आश्वासन दिया ,"सर ! मैं अपनी ओर से कोई कोशिश न छोडूंगा,आप हौंसला रखिये "
अनिरुद्ध चौधरी अपनी जीप की ओर तथा तहसीलदार अनमोल चौधरी एवं अंजना चौधरी अपनी जीप की ओर चल पड़े। दोनों पति पत्नी गहन चिंता में डूबे हुए थे। परसों सुबह साढ़े नौ बजे अंजुरी घर से निकली थी। अनिरुद्ध चौधरी ने उनसे ढेरों सवाल भी पूछे ,जैसे क्या वो किसी रिश्तेदार के यहाँ शहर जा सकती है ? उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं हुआ ,लेकिन वे अभी ही पोस्ट ऑफिस जाकर फ़ोन द्वारा
पता करेंगे। उनकी एकमात्र रिश्तेदार अंजुरी की नानी है। अनिरुद्ध चौधरी ने प्रस्ताव रखा " आप अपनी जीप यहीं छोड़ दीजिये ,मेरे साथ चलिए थाने से फ़ोन कर लीजियेगा,मेरा भी काम हो जायेगा और मैं आपको यहीं छोड़ दूंगा। अनमोल ठाकुर को सुझाव अच्छा लगा और वे अनिरुद्ध चौधरी की जीप में जा बैठे। वे अगले दस मिनट में थाने जा पहुंचे।
उन्होंने अंजुरी की नानी के गांव के पोस्ट ऑफिस में फ़ोन लगाया। उन्होंने पूछा कि पता कर के बता दें कि क्या अंजुरी वहां पहुंची है ? यद्यपि उस काल में यह प्रश्न भी परिवार की मर्यादा के विपरीत था किन्तु यह अनिवार्य प्रश्न था जिसका उत्तर मिलना अन्वेषण को एक चरण आगे बढाने वाला था। और यह उत्तर "नहीं" में मिला था। नानी के घर जाकर ,एकमात्र पोस्टमैन पूछ कर आया था।
तभी कॉन्स्टेबल्स राजेश दवे और उमेश साहू दोनों ही तेजी से झपटते हुए अंदर आये ,कुछ बोलना चाहते थे किन्तु तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी को देख कर चुप हो गए ---क्रमशः
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें