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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

Dharm & Darshan : Ahankaar Hanan !!



*कभी कबूतर का घोंसला देखा है । टूटा, उजड़ा सा और कभी कभी तो होता ही नही हैं ,ऐसा क्यों?*

 *घोंसला*

बात उस जमाने की है जब कबूतर झाड़ियों में अण्डे दिया करते थे। लोमड़ी आती और उनके अण्डे खा जाती। रखवाली का कोई ठीक प्रबन्ध न बन पड़ा तो कबूतरों ने चिड़ियाँ से बचाव का उपाय पूछा।

चिड़ियाँ ने कहा,"पेड़ पर घोंसला बनाने के अलावा और कोई चारा नहीं।"

कबूतर ने घोंसला बनाया पर वह ठीक तरह बन न सका। आखिर उसने तय किया कि चिड़ियाँ की सहायता से घोंसला बनाने का काम पूरा किया जाय।

चिड़ियाँ को बुलाया तो वे खुशी खुशी आई और कबूतर को अच्छा घोंसला बनाना सिखाने लगी। अभी बनना शुरू ही हुआ था कि कबूतर ने कहा- "ऐसा बनाना तो हमें आता हैं, यों तो हमीं बना लेंगे।" 

चिड़ियाँ वापिस चली गई। कबूतर ने बहुत कोशिश की, पर घोंसला ठीक से बना नहीं। वह फिर चिड़ियाँ के पास गया। चिढ़ती हुई वे फिर आई और तिनके ठीक तरह से जमाना सिखाने लगी। आधा काम भी पूरा न हो पाया था कि कबूतर उचका। उसने कहा- “ऐसे तो मैं जानता ही हूँ।”

चिड़ियाँ वापिस चली गई। कबूतर लगा रहा, पर फिर भी वह बना न सका। 

चिड़ियाँ के पास फिर पहुँचा तो उसने साफ इनकार कर दिया और कहा -  "जो जानता कुछ नहीं और मानता है कि मैं सब कुछ जानता हूँ, ऐसे प्राणी को कोई कुछ नहीं सिखा सकता।"

नासमझ कबूतर अपने अहंकार में किसी से कुछ न सीख सका और आज तक उसका घोंसला अन्य चिड़ियों की तरह नहीं बनता है, वह टुटा फूटा ही बना पाता है ।

कहानी कहती है कि..

*आज सबसे बडी विडंबना यह है कि  हम सोचते है कि हमसब कुछ जानते है, जबकि सच्चाई यह है की हम बहुत कुछ नहीं जानते हैं!!*  

सिर्फ और सिर्फ हमारा अहंकार ही हमारी प्रगति को रोक सकता है और कोई नही।

*जीवन मे सफलता का रहस्य , लगातार सीखते रहना!!*
 
              *"अहंंकार एक ब्लैक होल की तरह होता है जो हमारी चेतना पर अत्यधिक गुरुत्वीय खिंचाव डालता है। यह उसे विकसित नहीं होने देता। जबकिएक अहंकाररहित हृदय, एक विनम्र हृदय, अपने आप ही स्वर्ग को अपनी ओर खींचता है।"*
Story Team Jodhpur

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